बलिया/बांसडीह। गोंड समुदाय के अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र निर्गत करने की मांग को लेकर बांसडीह तहसील पर चल रहा अनिश्चितकालीन धरना 21 अप्रैल को भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने तहसील प्रशासन पर प्रमुख सचिव के स्पष्ट शासनादेश की अवहेलना और दोहरे मापदंड अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है।
धरनारत लोगों का कहना है कि आजादी पूर्व के भू-राजस्व अभिलेखों और जन्म-मृत्यु रजिस्टरों में “गोंड” दर्ज होने के बावजूद उनके आवेदन लगातार निरस्त किए जा रहे हैं। जबकि हाल ही में चार व्यक्तियों को समान साक्ष्यों के आधार पर प्रमाण पत्र जारी किया गया, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
गोंड समुदाय के नेताओं का आरोप है कि 3 नवंबर 2021 के शासनादेश में स्पष्ट निर्देश होने के बावजूद तहसील स्तर पर मनमानी की जा रही है। गोंगपा तहसील इकाई अध्यक्ष उमाशंकर गोंड ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही सभी पात्र लोगों को प्रमाण पत्र जारी नहीं किए गए, तो आंदोलन को और तेज करते हुए ‘जेल भरो आंदोलन’ शुरू किया जाएगा।
धरने में बड़ी संख्या में समुदाय के लोग शामिल रहे, जिन्होंने एक स्वर में प्रशासन से न्याय की मांग की। यह आंदोलन अब केवल प्रमाण पत्र का मुद्दा नहीं, बल्कि अधिकार और सम्मान की लड़ाई का प्रतीक बनता जा रहा है।
