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लखनऊ: अमृत सरोवर बने खेल मैदान, कैसे प्यास बुझाएं बेजुबान! दिन में पड़ रही भीषण गर्मी में पानी की तलाश में इधर से उधर भटक रहे बेजुबान पशु-पक्षी


लखनऊ। राजधानी लखनऊ सहित सूबे के सभी जिलों में करोड़ों के खर्च से बने अमृत सरोवर जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता से निष्प्रयोज्य साबित हो रहे हैं। देखभाल के अभाव में ज्यादातर सरोवर सूख गए हैं,और साफ सफाई न होने से जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। किनारे लगी बेंच व कुर्सियां भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। ऐसे में इन सरोवरों से न तो बेजुबान पशुओं को अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी मिल पा रहा और न ही भूमिगत जलस्तर को संतुलित रखने का उद्देश्य ही पूरा हो पा रहा है।गांवों में जल संरक्षण और ग्रीष्मकाल में मवेशियों से लेकर मनुष्यों को जल उपलब्धता के लिए बनाए गए अमृत सरोवर कागजों में भले ही पूरे हो गए,लेकिन मौके पर वे अब भी मैदान ही हैं।गर्मी में इन सरोवरों में दूर-दूर तक चुल्लू भर पानी नजर नहीं आ रहा है। सरोवर बनाने के साथ ही सौंदर्यीकरण कार्य भी निर्माण के दौरान कराया गया था।इसके तहत सरोवर क्षेत्र को चारों तरफ से कंटीले तारों से घेरने के साथ ही लोगों के बैठने के लिए बेंच के साथ ही झंडारोहण स्थल भी बनाया गया। इसका उद्देश्य था,कि सुबह व शाम के समय लोग सरोवर किनारे सैर कर स्वास्थ्य लाभ कर सके।लेकिन देेखभाल न होने से निर्माण कार्य पूरा होने के थोड़े समय बाद से ही इन सरोवरों की उपयोगिता समाप्त होने लगी।उपेक्षा के कारण क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक अमृत सरोवर सूख कर बदहाल हो चुके हैं।इनका पानी पूरी तरह सूख चुका है।इस कारण गांव के बच्चों ने इन अमृत सरोवरों को अपना खेल का मैदान बना लिया है।

बता दें कि आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने पर आजादी के अमृत महोत्सव के तहत 24 अप्रैल 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अमृत सरोवर की शुरुआत की गई थी,जिसमें प्रदेश हर जिले में 75 अमृत सरोवर बनाने का आह्वान किया गया था।उसके बाद उत्तर प्रदेश में लक्ष्य से लगभग दोगुना अमृत सरोवर बनाए गए,और एक साल बाद इन सरोवरों पर सेल्फी विद अमृत सरोवर का प्रोग्राम भी आयोजित किये गए।वहीं 15 अगस्त 2022 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अमृत सरोवरों पर झंडारोहण के साथ राष्ट्रप्रेम की भावना से ओतप्रोत प्रोग्राम भी कराए गए।इतना ही नहीं इनकी उपयोगिता को लेकर कहा गया था,कि अमृत सरोवर लोगों के स्वस्थ और स्वच्छ जीवन का आधार बनेंगे,वाटर रिचार्जिंग के तो अच्छे स्रोत बनेंगे ही,ग्रामीणों के जीवन में खुशहाली लाने का माध्यम बनेंगे। गांवों में पानी की कमी नहीं होगी। सरोवरों के चारों तरफ वृक्षारोपण से हरियाली रहेगी,शुद्ध प्राणवायु मिलेगी,इनकी देखभाल से तालाबो पर अवैध अतिक्रमण नहीं होगा,ग्रामीणों व ग्राम सभा की यह सार्वजनिक सम्पत्ति,एक ग्रामीण तीर्थ स्थल,ग्रामीण पर्यटन केन्द्र बनेगी।देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और जन आकांक्षाओं के अनुरूप उत्तर प्रदेश में लक्ष्य से दोगुना अमृत सरोवरो का निर्माण किया गया है। उदाहरण स्वरूप राजधानी में ही देख लीजिए कि बीकेटी विकासखंड क्षेत्र के जलालपुर गांव, गोहना खुर्द, कुम्हरावां, अन्य में लाखों खर्चकर बनाए गए अमृत सरोवर की क्या हालत है। ग्रामीणों ने बताया कि हमारे गांव में सरोवर बनाने में जमकर भ्रष्टाचार किया गया है। जल संरक्षण के लिए जरूरी इंतजाम नहीं होने से यह सरोवर मैदान में तब्दील हो गया है।उन्होंने यह भी बताया कि क्षेत्र में कुछेक को छोड़कर बाकी अन्य सरोवरों में पानी की एक बूंद भी नहीं बची है।ज्यादातर सरोवरों में वर्षाकाल में तो कुछ पानी रहता है,लेकिन मानसून विदा होते ही यह फिर मैदान बन जाते हैं।लंबे समय तक पानी का संरक्षण हो सके,लेकिन इसके लिए कोई भी प्रयास नजर नहीं आ रहे हैं।

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