लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियां तेज करते हुए बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने पार्टी के सभी जिला अध्यक्षों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पार्टी की ओर से जारी एक आधिकारिक पोस्टर के माध्यम से आगामी यू.पी. विधानसभा उपचुनाव और संगठन की मजबूती को लेकर विशेष रणनीति साझा की गई है। इन दिशा-निर्देशों में विशेष रूप से महिला आरक्षण और संगठन विस्तार पर पार्टी के रुख को स्पष्ट किया गया है।
पार्टी द्वारा जारी प्रमुख दिशा-निर्देश
चुनावी तैयारी और आर्थिक मजबूती- 31 मार्च 2026 को लखनऊ में हुई प्रदेश स्तरीय बैठक का हवाला देते हुए कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे यू.पी. विधानसभा उपचुनाव के लिए पूरी ईमानदारी से जुट जाएं। कैडर के जरिए जनाधार बढ़ाने और संगठन को आर्थिक रूप से मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है।
बीएसपी शासन के कार्यों का प्रचार- कार्यकर्ताओं से कहा गया है कि वे जनता के बीच जाकर एक्सप्रेस-वे और नोएडा एयरपोर्ट जैसी बड़ी परियोजनाओं का श्रेय बीएसपी सरकार को दें। साथ ही, यह आरोप भी लगाया गया कि पिछली कांग्रेस सरकारों ने श्जातिवादी मानसिकताश् के चलते इन जनहित कार्यों को बाधित किया था।
कानून द्वारा कानून का राज- बसपा ने अपने पारंपरिक नारे श्सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखायश् को दोहराते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश का समुचित विकास केवल बसपा के शासन मॉडल में ही संभव है।
महिला आरक्षण पर स्पष्ट रुख- पार्टी ने साफ किया है कि 15 अप्रैल 2026 को मीडिया और सोशल मीडिया (एक्स) पर महिला आरक्षण को लेकर जो स्टैंड रखा गया था, वही पार्टी का आधिकारिक रुख है और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा।
अनुशासन का पाठ- बसपा ने अपने कार्यकर्ताओं को सख्त निर्देश दिए हैं कि महिला आरक्षण के समर्थन के मामले में पार्टी के अनुशासन के विरुद्ध कोई भी धरना-प्रदर्शन या आंदोलन न किया जाए।
सशक्त संगठन, मजबूत जनाधार का संकल्प
पोस्टर के जरिए बसपा ने अपना संकल्प दोहराया है कि पार्टी का मुख्य लक्ष्य श्सशक्त संगठनश् और श्मजबूत जनाधारश् तैयार करना है, ताकि आने वाले चुनावों में सर्वजन का उत्थान सुनिश्चित किया जा सके। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बसपा का यह कदम कार्यकर्ताओं में स्पष्टता लाने और चुनावी मोड में सक्रिय होने का एक बड़ा संकेत है।
