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सुल्तानपुरः हाईकोर्ट से सरकारी जमीन कब्जा किए अतिक्रमणकारियों को झटका,4 याचिकाएं खारिज! हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग का दिया हवाला,सरकारी उपयोग की जमीनों का नहीं हो सकती अदला बदली


लंभुआ/सुल्तानपुर। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने लंभुआ तहसील के ग्राम पंचायत हरिहरपुर में तालाब, खलिहान और पंचायत भवन की जमीन पर वर्षों से काबिज अतिक्रमणकारियों को बड़ा झटका दिया है। न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने अतिक्रमणकारियों की चार रिट याचिकाओं को खारिज करते हुए 30 मई 2026 तक जमीन खाली करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि 30 मई तक कब्जा न हटने पर प्रशासन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा।

न्यायालय ने रिट-सी संख्या 9411ध्2023, 9380ध्2023, 4205ध्2026 और 4207ध्2026 को खारिज कर दिया। ये याचिकाएं अच्छेलाल (मृतक) की ओर से उनके वारिस, हरि प्रसाद, राकेश कुमार वर्मा और पंकज कुमार वर्मा ने दाखिल की थीं। वहीं ग्राम सभा की रिट-सी संख्या 4242ध्2023 को निस्तारित करते हुए कोर्ट ने अतिक्रमण हटाकर जमीन खाली कराने के निर्देश दिए।

याचिकाकर्ताओं ने गाटा संख्या 222 रकबा 0.4710 हेक्टेयर तालाब, गाटा 327 रकबा 0.1580 हेक्टेयर खलिहान और गाटा 326 रकबा 0.0250 हेक्टेयर पंचायत भवन की जमीन पर 1945 से पहले के इकरारनामा के आधार पर अपना दावा किया था। राजस्व विभाग ने यूपी राजस्व संहिता की धारा-67 के तहत 27 मई 2023 को बेदखली का आदेश पारित किया था। 12 अक्तूबर 2023 को अपील भी खारिज हो गई। इसके बाद 17 अप्रैल 2026 को ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी किया गया था।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि 1950 में जमींदारी उन्मूलन कानून लागू होने के बाद याचिकाकर्ताओं का नाम कभी भी राजस्व अभिलेखों में दर्ज नहीं हुआ। चकबंदी के दौरान भी उन्होंने कोई आपत्ति दाखिल नहीं की। ऐसे में अब केवल इकरारनामा के आधार पर मालिकाना हक का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ’बाबू सिंह बनाम चकबंदी अधिकारीरू 2026 प्छैब् 395’ के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि तालाब,खलिहान, पंचायत भवन जैसी सार्वजनिक उपयोग की जमीन की अदला-बदली किसी भी स्थिति में नहीं हो सकती। सरकारी आदेश भी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विरुद्ध प्रभावी नहीं होगा। निचली अदालत में दाखिल निषेधाज्ञा वाद में भी याचिकाकर्ताओं के पक्ष में कोई स्थगन आदेश पारित नहीं है।

कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को जमीन खाली करने के लिए एक माह का समय दिया है। 30 मई 2026 तक एसडीएम लंभुआ के समक्ष शपथ पत्र देकर कब्जा हटाना होगा। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि इस दौरान कोई अन्य कानूनी कार्यवाही की गई तो दी गई राहत स्वतः समाप्त हो जाएगी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने स्वयं स्वीकार किया कि गाटा संख्या 326 पर उनका कब्जा नहीं है।

मिली जानकारी के अनुसार एसडीएम लंभुआ को हाईकोर्ट के आदेश की प्रति प्राप्त हो चुकी है। 30 मई तक जमीन खाली न होने पर नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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