बलिया। उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश कुमार शुक्ला ने बलिया के किसानों की गोसंरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि जनपद में गौवंश संरक्षण की घर-घर आधारित व्यवस्था एक सफल मॉडल के रूप में उभरी है। 30 गौशालाओं में 2295 गोवंश संरक्षित हैं, जबकि 1130 गोवंश किसानों और सेवकों के घरों में पालन-पोषण पा रहे हैं।
बलिया। लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवन में आयोजित प्रेसवार्ता में उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग के उपाध्यक्ष मा. श्री महेश कुमार शुक्ला एवं सदस्य श्री दीपक गोयल ने जनपद में गोवंश संरक्षण की स्थिति पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे प्रदेश के लिए अनुकरणीय बताया। उन्होंने कहा कि कई जनपदों के भ्रमण के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि बलिया के किसान गोपालन और गोसंरक्षण के प्रति विशेष रूप से जागरूक हैं।
उन्होंने बताया कि जनपद में गोवंशों को किसानों के भरोसे सौंपने की व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू है। वर्तमान में जिले की 30 गौशालाओं में 2295 गोवंश संरक्षित हैं, जबकि 1130 गोवंश किसानों और सेवकों के घरों में संरक्षित किए जा रहे हैं। यह व्यवस्था न केवल गोवंशों के बेहतर संरक्षण का माध्यम बनी है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही है।
उपाध्यक्ष ने कहा कि सरकार की योजना के तहत इच्छुक किसान अथवा सेवक आधार कार्ड के माध्यम से अधिकतम चार गोवंश अपने घर ले जा सकते हैं। प्रत्येक गोवंश के भरण-पोषण के लिए सरकार द्वारा प्रति माह 1500 रुपये की सहायता सीधे लाभार्थी के खाते में भेजी जाती है। उन्होंने कहा कि गौमाता का वास्तविक संरक्षण घरों में पालन-पोषण से ही संभव है और सरकार इसी मॉडल को बढ़ावा दे रही है।
उन्होंने मुख्यमंत्री के निर्देशों का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रदेशभर में गौशालाओं के निरीक्षण के लिए टीमें गठित की गई हैं तथा योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पूरे उत्तर प्रदेश में 7700 से अधिक गौशालाएं संचालित हैं, जिनमें करीब 16 लाख गोवंश संरक्षित हैं।
प्रेसवार्ता में बलिया मॉडल की चर्चा करते हुए कहा गया कि यहां किसानों की सहभागिता और प्रशासनिक प्रयासों के समन्वय से गोवंश संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हो रहा है, जो अन्य जिलों के लिए प्रेरणा बन सकता है।
