पीलीभीत। जनपद में लगभग 45 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में पेड़ी (रैटून) गन्ना फसल का उत्पादन किया जाता है। गन्ना कटाई के बाद पेड़ी फसल के वैज्ञानिक प्रबंधन को लेकर जिला गन्ना अधिकारी खुशी राम भार्गव ने किसानों को महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उन्होंने बताया कि यदि पेड़ी फसल का वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन किया जाए तो यह कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली अत्यंत लाभकारी फसल साबित हो सकती है।जिला गन्ना अधिकारी के अनुसार पेड़ी फसल में जड़ों की सक्रियता बनाए रखना और पोषक तत्वों की उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। इसके लिए कटाई के तुरंत बाद स्टबल शेविंग कर भूमि की सतह पर ठूंठ को समतल करना चाहिए, जिससे नई कोंपलों का समान और तेज विकास हो सके। साथ ही ट्रैश मल्चिंग अपनाने से खेत में नमी का संरक्षण, तापमान संतुलन और सूक्ष्मजीव गतिविधियों में वृद्धि होती है।
उन्होंने बताया कि पेड़ी प्रबंधन में उपयोग होने वाले कृषि यंत्र जैसे आरएमडी, ट्रैश मल्चर एवं ट्रैक्टर जनपद की गन्ना समितियोंकृपीलीभीत, मझोला, बीसलपुर और पूरनपुर में उपलब्ध हैं, जिन्हें किसान किराये पर प्राप्त कर सकते हैं।उर्वरक प्रबंधन के तहत प्रति हेक्टेयर 150दृ180 किलोग्राम नाइट्रोजन (लगभग 325दृ390 किलोग्राम यूरिया) का प्रयोग 2दृ3 भागों में करना चाहिए। इसके साथ ही 60दृ80 किलोग्राम फास्फोरस और 60दृ80 किलोग्राम पोटाश का संतुलित उपयोग जड़ों के विकास और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। साथ ही 8दृ10 टन प्रति हेक्टेयर गोबर की सड़ी खाद या कम्पोस्ट का प्रयोग मृदा की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है।जिन क्षेत्रों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी है, वहां 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर का उपयोग लाभकारी बताया गया है। इसके अलावा एजोटोबैक्टर और पीएसबी जैसे जैव उर्वरकों के प्रयोग से नाइट्रोजन स्थिरीकरण और फास्फोरस की उपलब्धता बढ़ती है।पेड़ी फसल में गैप फिलिंग, समय पर सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और मिट्टी चढ़ाने जैसे कार्यों को समन्वित रूप से अपनाने से पौध संख्या और टिलरिंग में वृद्धि होती है, जिससे अंततः उत्पादन में सुधार होता है।
गन्ना विकास विभाग के अनुसार इन वैज्ञानिक तकनीकों के सही क्रियान्वयन से पेड़ी फसल की उत्पादकता में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है। साथ ही लागत में कमी आने से किसानों की आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।अंत में विभाग ने जनपद के सभी गन्ना किसानों से अपील की है कि वे आधुनिक एवं वैज्ञानिक पेड़ी प्रबंधन तकनीकों को अपनाकर गन्ना उत्पादन को अधिक लाभकारी बनाएं तथा किसी भी जानकारी के लिए नजदीकी चीनी मिल या विभागीय अधिकारियों से संपर्क करें।
