सोनभद्र जिले में इन दिनों रसोई गैस की किल्लत से आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गैस एजेंसियों पर लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं, लेकिन इसके बावजूद लोगों को समय पर सिलिंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। आपूर्ति प्रभावित होने से हालात और भी गंभीर हो गए हैं।
त्योहारों के मद्देनजर पहले से ही आपूर्ति व्यवस्था कमजोर थी, वहीं अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण गैस सप्लाई पर अतिरिक्त दबाव पड़ गया है। जिले की अधिकांश गैस एजेंसियों पर घरेलू गैस का स्टॉक खत्म हो चुका है, जबकि कुछ स्थानों पर आपूर्ति में देरी के चलते स्थिति और बिगड़ गई है। इससे उपभोक्ताओं को एजेंसियों के बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। गैस की कमी का असर होटल और रेस्टोरेंट व्यवसाय पर भी साफ दिख रहा है। कॉमर्शियल सिलिंडर न मिलने से कई होटल और रेस्टोरेंट लगभग बंद हो गए हैं। वहीं कुछ स्थानों पर घरेलू गैस का व्यावसायिक उपयोग किए जाने के आरोप भी सामने आ रहे हैं।
जिले में आईओसीएल, बीपी और एचपी की कुल 44 गैस एजेंसियां संचालित हैं, जिनसे करीब 3 लाख 65 हजार से अधिक उपभोक्ता जुड़े हुए हैं। इनमें लगभग 2.55 लाख उपभोक्ता उज्ज्वला योजना के लाभार्थी हैं। सामान्य दिनों में शहरों में नियमित और ग्रामीण क्षेत्रों में एक दिन के अंतराल पर सिलिंडर की आपूर्ति होती रही है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से एजेंसियों को ही पर्याप्त सप्लाई नहीं मिल पा रही है।
रॉबर्ट्सगंज, ओबरा, चोपन, दुद्धी, अनपरा, रेणुकूट, म्योरपुर और बभनी समेत जिले के विभिन्न इलाकों में हालात गंभीर बने हुए हैं। कई जगहों पर उपभोक्ताओं का कहना है कि वे 30 से 45 दिनों से बुकिंग के बाद भी सिलिंडर का इंतजार कर रहे हैं।
उपभोक्ताओं का आरोप है कि कई एजेंसियों पर ताला लटका हुआ है और संपर्क करने पर मोबाइल नंबर भी बंद मिल रहे हैं। एजेंसी पहुंचने पर स्टॉक न होने की बात कहकर वापस लौटा दिया जाता है, जिससे लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।
घरेलू गैस की इस कमी ने आम जनजीवन को प्रभावित कर दिया है और लोग जल्द से जल्द आपूर्ति बहाल होने की उम्मीद कर रहे हैं। प्रशासन से भी स्थिति सुधारने की मांग तेज हो गई है।
