पीलीभीत। रमजान का पवित्र महीना हमेशा ही समाज में भाईचारे, एकता और मानवता की भावना को जागृत करने वाला माना जाता है। इस वर्ष भी मरहूम अहलिया रुकैया आरिफ की बरसी के अवसर पर आयोजित फातिहा और इफ्तार कार्यक्रम ने यही संदेश दिया कि धर्म केवल व्यक्तिगत आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी का माध्यम भी बन सकता है। सामाजिक जिम्मेदारी और नेतृत्व की मिसाल कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे मोहम्मद आरिफ ने न केवल धार्मिक भावनाओं को सम्मानित किया, बल्कि बच्चों और जरूरतमंदों के लिए समाज सेवा का एक प्रेरक उदाहरण भी पेश किया। फातिहा के बाद मदरसा गुलशने फातिमा न्योरिया में लगभग 400-500 बच्चियों को इफ्तार कराया गया, जो उनके सच्चे नेतृत्व और समाज सेवा की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मोहम्मद आरिफ न केवल धर्म और सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय हैं, बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित करते हैं, जिससे प्रेम, सहयोग और भाईचारे की भावना मजबूत होती है।
राजनीतिक दृष्टि से भी मोहम्मद आरिफ की सक्रियता उल्लेखनीय रही है। 127 विधानसभा क्षेत्र से संभावित प्रभावशाली नेता के रूप में उनकी छवि एक ऐसे व्यक्तित्व की है जो धर्म, समाज सेवा और सांस्कृतिक गतिविधियों में समान रूप से सक्रिय हैं। यह संतुलन उन्हें न केवल लोकप्रिय बनाता है, बल्कि उनके नेतृत्व की विशिष्टता को भी स्पष्ट करता है। बरसी और इफ्तार कार्यक्रम ने यह साबित किया कि जब नेतृत्व और समाज सेवा का संगम होता है, तो इसके प्रभाव केवल समारोह तक सीमित नहीं रहते। समाज में स्थायी सकारात्मक बदलाव और भावनात्मक एकजुटता को भी यह बढ़ावा देता है। मोहम्मद आरिफ के इस प्रयास ने दिखाया कि समाज के लिए ऐसे कार्यक्रम न केवल प्रेरणा का स्रोत बनते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों में भी सामाजिक जिम्मेदारी और मानवता के मूल्यों को सुदृढ़ करते हैं।
