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तिलोई: आईसीएमआर-सीईएल चला रहे नवजात देखभाल कार्यक्रम! कम वजन वाले बच्चों को घर पर मिल रही कंगारू मदर केयर


तिलोई/अमेठी। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और कम्युनिटी एंपावरमेंट लैब (सीईएल) के सहयोग से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) तिलोई में नवजात गहन नवजात देखभाल (एनएनआईसीयू) कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य नवजात शिशुओं की मृत्यु दर को कम करना है।इस कार्यक्रम के तहत, आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर कम वजन वाले नवजात बच्चों की पहचान करती हैं। इन बच्चों को उनके घर पर ही कंगारू मदर केयर (केएमसी) प्रदान की जा रही है।स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा समर्थित केएमसी, 2500 ग्राम से कम वजन वाले या समय से पहले जन्मे बच्चों के लिए एक जीवन रक्षक कार्यक्रम है।डॉ.अवनीश चंद्रा बताते हैं कि कंगारू मदर केयर में शिशु को मां या परिवार के अन्य सदस्य की नंगी छाती से सीधे सटाकर रखा जाता है जिसे त्वचा से त्वचा का संपर्क कहते हैं। इसके साथ ही अनन्य स्तनपान सुनिश्चित किया जाता है जिससे बच्चे को आवश्यक पोषण मिले और संक्रमण का जोखिम कम हो।सीएचसी की आशाएं और एएनएम क्षेत्र के ऐसे शिशुओं को चिन्हित कर रही हैं और उनकी माताओं को केएमसी थेरेपी के लिए प्रशिक्षित कर रही हैं।डॉ.चंद्रा के अनुसार जब बच्चा स्थिर हो जाता है तो उसे जल्दी अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है और घर पर ही केएमसी जारी रखने की सलाह दी जाती है।यह थेरेपी दिन में लगातार या कम से कम 7-8 घंटे के लिए दी जा सकती है।केएमसी हाइपोथर्मिया (ठंड) से बचाता है और शारीरिक तापमान बनाए रखता है।सीधे संपर्क और स्तनपान से बच्चे का वजन तेजी से बढ़ता है।मां के स्पर्श से कीटाणुओं से सुरक्षा मिलती है शिशु को बेहतर नींद आती है तनाव कम होता है और धड़कनें सामान्य रहती हैं।इस प्रक्रिया को एनआईसीयू (नवजात गहन चिकित्सा इकाई) में या घर पर भी अपनाकर नवजात मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इस कार्यक्रम से क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का विश्वास बढ़ रहा है।

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