लखनऊ। शुक्रवार को बलरामपुर चिकित्सालय में लगभग 60 रिक्शा लावारिस रिक्शा चालक को अत्यंत गंभीर अवस्था में इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया था। जानकारी अनुसार उक्त रिक्शा चालक का लगभग 15 वर्ष पूर्व आंतों का ऑपरेशन हुआ था, जिसमें पेट की बाहरी आंत को खोलकर मल त्याग का रास्ता (स्टोमा) बनाया गया था। आर्थिक रूप से अत्यधिक कमजोर होने के कारण मरीज द्वारा उस स्टोमा को बाद में बंद नहीं कराया गया, जिसके चलते पेट में संक्रमण होकर घाव हो गया था।
मंगलवार को बलरामपुर चिकित्सालय प्रशासन से अनुमति प्राप्त कर मरीज का सफलतापूर्वक पुनः ऑपरेशन कर आंतों को जोड़ दिया गया। ऑपरेशन वरिष्ठ सर्जन ड़ा. आर आर समद्दर द्वारा किया गया।मरीज का उपचार अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य कर्मचारियों द्वारा पूर्ण समर्पण के साथ किया जा रहा है।
इस संबंध में निदेशक ड़ा. कविता आर्य ने कहा कि “लावारिस एवं जरूरतमंद मरीजों को भी सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है।”
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ड़ा. हिमांशु चतुर्वेदी ने बताया कि “मरीज की स्थिति गंभीर थी, लेकिन समय पर उपचार एवं टीम वर्क से सफल परिणाम प्राप्त हुआ।”
चिकित्सा अधीक्षक ड़ा. प्रवीण श्रीवास्तव ने कहा कि “अस्पताल प्रशासन सभी मरीजों को गुणवत्तापूर्ण एवं त्वरित उपचार देने के लिए प्रतिबद्ध है।”
इस उपचार में डॉ. एस. आर. समद्दार के साथ डॉ. नीरज शेखर, डॉ. शशांक साहू (निश्चेतक), ड़ा.एम पी सिंह एवं स्टाफ नर्स सीमा शुक्ला सहित पूरी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
