प्रतापगढ़/बाबागंज। प्रतापगढ़ में भाजपा की जिला कार्यकारिणी सूची ने संगठन के भीतर सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। बाबागंज विधानसभा क्षेत्र को पूरी तरह नजरअंदाज किए जाने से कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है, जो अब खुलकर सामने आने लगा है। जिले में प्रतिनिधित्व न मिलने से उनमें भाजपाइयों में गहरी नाराजगी है। आरोप है कि चयन में जुआड़ और पक्षपात को वरीयता दी गई है। नाराज कार्यकर्ताओं ने अल्टीमेटम दिया कि यदि सुधार नहीं किया गया तो इसका असर आगामी चुनाव में दिखेगा।
प्रतापगढ़ जिले के बाबागंज विधानसभा क्षेत्र में भाजपा कार्यकर्ताओं की नाराजगी अब खुलकर सामने आ गई है। हाल ही में घोषित जिला कार्यकारिणी समिति की सूची को लेकर क्षेत्र के कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल दिया है और इसे संगठन के भीतर खुला भेदभाव बताया है।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि बाबागंज जैसे महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्र को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया, जबकि कुंडा विधानसभा क्षेत्र के महज 7 किलोमीटर के दायरे में तीन नेताओं को जिला महामंत्री जैसे अहम पद से नवाजा गया। इससे क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं में असंतोष और भी गहरा गया है।
सोमवार को भैसाना गांव में हीरागंज मंडल के पदाधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें कार्यकर्ताओं ने तीखी नाराजगी जताई। बैठक में मौजूद एक पदाधिकारी ने साफ कहा कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा और “जुगाड़” के जरिए कुछ लोगों ने पद हासिल कर लिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चयनित पदाधिकारियों में कुछ की उम्र अधिक होने के बावजूद उन्हें प्राथमिकता दी गई, जिससे जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
कार्यकर्ताओं ने अपनी स्थिति को “सांप-छछुंदर” जैसी बताते हुए कहा कि न तो सरकार में उनकी सुनवाई हो रही है और न ही संगठन में उन्हें महत्व दिया जा रहा है। उनका कहना है कि पार्टी पहले ही सवर्ण वर्ग से जुड़े मुद्दों को लेकर नाराजगी झेल रही थी, और अब कार्यकर्ताओं की अनदेखी ने हालात और बिगाड़ दिए हैं।
स्थानीय नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जिला कार्यकारिणी की सूची पर पुनर्विचार नहीं किया गया और बाबागंज को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला, तो इसका सीधा असर आगामी चुनावों में देखने को मिलेगा। फिलहाल, पार्टी नेतृत्व के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हैं। इस मौके पर हीरागंज मंडल अध्यक्ष मनोज पटेल, जिला प्रतिनिधि आशुतोष मणि द्विवेदी, शिवाकांत पांडेय, जगतपाल यादव, हंस राज मिश्र, छेदी लाल गौतम, रावेंद्र मिश्र, संगम मिश्र, ज्ञानेंद्र मौर्य इत्यादि कई सारे पदाधिकारी मौजूद रहे।
