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मुसाफिरखाना: देवी हिंगलाज मंदिर मे उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़


मुसाफिरखाना/अमेठी। चैत्र नवरात्र के छठे दिवस दादरा स्थित देवी हिंगलाज मंदिर पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। माता के दर्शन और पूजन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचे, जिससे मंदिर परिसर में दिनभर चहल-पहल बनी रही। करीब 40 वर्षों से माता हिंगलाज की सेवा कर रहे भक्त अंजनी कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि वे पिछले चार दशकों से निरंतर आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा में लगे हैं तथा पिछले 36 वर्षों से हिंगलाज महायज्ञ महोत्सव का आयोजन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस शक्तिपीठ की स्थापना संत बाबा पुरुषोत्तम दास ने हिंगल पर्वत पर कठोर तपस्या कर क्षेत्र और ग्राम की रक्षा हेतु की थी। मान्यता है कि माता ने वृद्धा के रूप में संत को दर्शन दिए और उनके साथ चलकर दादरा के पश्चिमी क्षेत्र में पिंडी व त्रिशूल के रूप में स्थापित हुईं। अंजनी श्रीवास्तव ने अपने जीवन से जुड़े कुछ आध्यात्मिक अनुभव साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2003 में महायज्ञ के दौरान, जब यज्ञशाला बॉस से बनाई गई थी और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग की गई थी, तभी एक दिव्य स्वरूप की युवती कमंडल में घी लेकर पहुंची। उसने विनम्रता से हवन करने की अनुमति मांगी। अनुमति मिलने पर उसने आहुति दी और अचानक अदृश्य हो गई, जिससे वहां उपस्थित श्रद्धालुओं में आश्चर्य फैल गया। लोगों ने इसे माता हिंगलाज का दिव्य स्वरूप माना। उन्होंने आगे बताया कि वर्ष 2005-06 में, जब याज्ञाचार्य मधुर जी के सान्निध्य में यज्ञ चल रहा था, उसी दौरान एक वृद्धा हाथ में डंडा और घी की बोतल लेकर आईं और वह बोतल याज्ञाचार्य को सौंप दी। याज्ञाचार्य ने वह बोतल उन्हें दे दी। इसके बाद वह वृद्धा यज्ञशाला की परिक्रमा करते हुए अचानक अदृश्य हो गईं। अंजनी श्रीवास्तव का कहना है कि उनके पास ऐसे कई अनुभव हैं, जिनसे उन्हें विश्वास है कि माता हिंगलाज समय-समय पर अपने भक्तों को साक्षात दर्शन देकर उनकी आस्था को दृढ़ करती हैं।

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