बरखेड़ा। आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच जिले की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब बसपा सरकार में तीन बार विधायक और मंत्री रहे पूर्व मंत्री अनीस अहमद खां उर्फ फूल बाबू ने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। उन्होंने हाल ही में अपने हजारों समर्थकों के साथ लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी मुख्यालय पहुंचकर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव से मुलाकात की और पार्टी का दामन थाम लिया।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले सपा प्रमुख द्वारा फूल बाबू को पार्टी में शामिल कराना एक बड़ा राजनीतिक दांव माना जा रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय और लोकप्रिय नेता के रूप में पहचाने जाने वाले अनीस अहमद खां को सपा में शामिल किए जाने के बाद पीलीभीत जिले की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा शुरू हो गई है।जानकारों के अनुसार पीलीभीत जिले में लंबे समय से मुस्लिम समाज का कोई बड़ा राजनीतिक चेहरा सक्रिय नहीं था। इससे पहले पीलीभीत शहर से हाजी रियाज अहमद विधायक रहे थे और सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बने थे। उनके निधन के बाद से जिले में मुस्लिम समाज का बड़ा प्रतिनिधि चेहरा सामने नहीं आ पाया था। ऐसे में पूर्व मंत्री फूल बाबू के सपा में आने से राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना जताई जा रही है।सूत्रों की मानें तो यदि समाजवादी पार्टी पीलीभीत सदर विधानसभा सीट से अनीस अहमद खां उर्फ फूल बाबू को प्रत्याशी बनाकर चुनाव मैदान में उतारती है तो मुकाबला काफी रोचक हो सकता है। बताया जाता है कि सदर विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब डेढ़ लाख के आसपास है। वहीं फूल बाबू की पकड़ मुस्लिम समाज के साथ-साथ अन्य वर्गों में भी बताई जाती है, जिससे सपा को लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।
इधर राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा भी पीलीभीत शहर सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट के दावेदार हो सकते हैं। हेमराज वर्मा ने अपने राजनीतिक जीवन में बरखेड़ा विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर चुनाव जीतकर प्रदेश सरकार में मंत्री पद भी संभाला था। हालांकि बाद के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।बताया जाता है कि हार के बाद हेमराज वर्मा ने कुछ समय के लिए भाजपा का दामन भी थाम लिया था, लेकिन वहां अपेक्षित स्थान न मिलने के कारण वे पुनः समाजवादी पार्टी में लौट आए। अब उनके पीलीभीत शहर सीट से चुनाव लड़ने की चर्चा राजनीतिक गलियारों में तेज है। फिलहाल यह तय करना पार्टी नेतृत्व के हाथ में है कि आगामी विधानसभा चुनाव में पीलीभीत सदर सीट से किसे मैदान में उतारा जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि टिकट वितरण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि जिले की राजनीति में किसका पलड़ा भारी रहेगा और जनता किसे अपना प्रतिनिधि चुनती है।
