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संग्रामपुर: मां चंद्रघंटा की सच्चे मन से आराधना ही सफलता की कुंजी-पीठाधीश्वर


संग्रामपुर/अमेठी। वासंतिक नवरात्रि के पावन अवसर पर जनपद के प्रसिद्ध शक्तिपीठ कालिकन धाम में श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां के चंद्रघंटा स्वरूप के दर्शन के लिए तड़के से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। घंटे-घड़ियालों की गूंज और जय माता दी के उद्घोष से पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। धाम के पीठाधीश्वर महाराज ने इस अवसर पर भक्तों को मां के स्वरूप की महत्ता समझाई। उन्होंने कहा मां चंद्रघंटा केवल ममता की मूरत नहीं, बल्कि वीरता और साहस की अधिष्ठात्री देवी हैं। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र इस बात का प्रतीक है कि एकाग्रता और आंतरिक शक्ति से किसी भी आसुरी शक्ति या जीवन की बाधा को परास्त किया जा सकता है।उन्होंने श्रद्धालुओं का आह्वान किया कि वे केवल कर्मकांड तक सीमित न रहें, बल्कि मां के गुणों को अपने चरित्र में उतारें। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन से मंदिर मार्ग से लेकर मुख्य परिसर तक मेले जैसा दृश्य रहा। भीड़ के दबाव को देखते हुए प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर दिखा। थाना प्रभारी संजय सिंह के नेतृत्व में चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहा। कतारबद्ध दर्शन की व्यवस्था और महिलाओं व बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। भारी भीड़ के बावजूद श्रद्धालुओं और सुरक्षाकर्मियों के बीच बेहतर समन्वय के कारण दर्शन प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती रही। दिनभर चले अनुष्ठान और विशेष पूजा-अर्चना के बाद संध्या आरती में भी भक्तों का तांता लगा रहा। कालिकन धाम में नवरात्रि का तीसरा दिन न केवल धार्मिक अनुष्ठान, बल्कि सामुदायिक सौहार्द और गहरे अनुशासन का भी परिचायक बना। श्रद्धालुओं ने मां के चरणों में मत्था टेककर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना की।

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