आगरा । समाज में मानवता, सेवा और परोपकार की भावना को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए सांसद नवीन जैन ने संसद में मरणोपरांत देहदान के विषय को प्रमुखता से उठाया और इस पर व्यापक जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता जताई।
सांसद नवीन जैन ने कहा कि मानवता और राष्ट्रहित से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर समाज का ध्यान आकर्षित किया जाना आवश्यक है। हमारी संस्कृति त्याग और परोपकार से परिपूर्ण रही है और हमारे शास्त्रों में भी कहा गया हैकृ “परोपकारार्थं इदं शरीरम्”।
सांसद नवीन जैन ने महर्षि दधीचि का उदाहरण देते हुए कहा कि उनका जीवन हमें यह संदेश देता है कि लोककल्याण के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करना ही सच्चा धर्म है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में देश के अनेक चिकित्सा संस्थानों और विद्यालयों में विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त मानव शरीर उपलब्ध नहीं हो पाते। एक कुशल डॉक्टर के निर्माण के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि यदि देहदान को बढ़ावा दिया जाए तो मृत्यु के बाद भी शरीर चिकित्सा शिक्षा और मानव जीवन की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
सांसद जैन ने कहा कि दुर्भाग्यवश समाज में अभी भी देहदान को लेकर कई भ्रांतियां और संकोच मौजूद हैं। धार्मिक मान्यताओं को लेकर भ्रम, अंतिम संस्कार को लेकर चिंता तथा सम्मान को लेकर आशंकाएं लोगों के मन में बनी रहती हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि देहदान एक पूर्णतः कानूनी प्रक्रिया है, जिसे पूरे सम्मान और गरिमा के साथ संपन्न किया जाता है, तथा किसी भी धर्म में परोपकार का विरोध नहीं किया गया है।
अंत में उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि देहदान के प्रति जागरूकता अभियान चलाए जाएं, शैक्षणिक संस्थानों में इस विषय पर चर्चा को प्रोत्साहित किया जाए तथा देहदान करने वाले परिवारों को सम्मानित किया जाए, जिससे समाज में सकारात्मक संदेश प्रसारित हो।
