पीलीभीत। जनपद इटावा के बढ़पुरा ब्लॉक परिसर में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व राज्यपाल, पद्म विभूषण से सम्मानित नेता कल्याण सिंह की प्रतिमा का भव्य अनावरण समारोह आयोजित हुआ। इस अवसर पर बरखेड़ा विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं महामंडलेश्वर स्वामी प्रवक्तानंद महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहे और राष्ट्रनायक के योगदान को नमन किया।
कार्यक्रम स्थल पर पहुंचते ही स्वामी प्रवक्तानंद महाराज का कार्यकर्ताओं ने पुष्पमालाओं और जयघोष के साथ स्वागत किया। प्रतिमा अनावरण समारोह में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिससे पूरा परिसर राष्ट्रभक्ति और उत्साह से सराबोर नजर आया।
विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए स्वामी प्रवक्तानंद महाराज ने कहा कि कल्याण सिंह का संपूर्ण सार्वजनिक जीवन राष्ट्रहित, सुशासन और जनसेवा को समर्पित रहा। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी अग्रणी भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके स्पष्ट विचार और दृढ़ नेतृत्व ने भारतीय राजनीति में उन्हें विशिष्ट स्थान दिलाया।
उन्होंने कहा कि सादगी, सरलता और राष्ट्रवादी चिंतन की प्रतिमूर्ति रहे कल्याण सिंह आज भी जनप्रतिनिधियों और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनके आदर्शों को आत्मसात कर समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान देना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कार्यक्रम में उन्नाव लोकसभा क्षेत्र से सांसद स्वामी सच्चिदानन्द हरि साक्षी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। इसके अलावा पूर्व सांसद एवं पूर्व मंत्री राजवीर सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह, फर्रुखाबाद से सांसद मुकेश राजपूत, पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत, विधायक चंद्रपाल सिंह, विधायक सरिता भदौरिया तथा अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा के प्रदेश अध्यक्ष साहब सिंह राजपूत सहित अनेक गणमान्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
स्वामी प्रवक्तानंद महाराज ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक बताते हुए आयोजकों और कार्यकर्ताओं को सफल आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन महान नेताओं के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनते हैं।
समारोह के दौरान राष्ट्रभक्ति के नारों और जयघोष से वातावरण गूंजता रहा। बड़ी संख्या में मौजूद समर्थकों और नागरिकों ने कल्याण सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
यह आयोजन केवल एक प्रतिमा अनावरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रहित और सुशासन के संकल्प को पुनः दोहराने का अवसर बन गया।
