कन्नौज। खाड़ी युद्ध को लेकर एलपीजी की उपलब्धता मे आई कमी पर एडवोकेट अंकित हजेला का कहना है कि इसका विकल्प होना आवश्यक है। उन्होंने कहा आज कल कई जगहों पर एलपीजी की कमी को लेकर जो चर्चा और परेशानी दिखाई दे रही है उसे देख कर पुरानी बात बार-बार याद आती है अगर मिट्टी के तेल (केरोसिन) की व्यवस्था पूरी तरह खत्म न की गई होती तो शायद आज इतना बावेला देखने को नहीं मिलता।
उन्होंने कहा कि मिट्टी का तेल उस दौर में सिर्फ एक ईंधन नहीं था बल्कि आम आदमी के लिए एक तरह का सहारा था। अक्सर ऐसा होता था कि किसी घर मे गैस खत्म हो गई और नया सिलेंडर आने मे समय लग रहा है। ऐसे में लोग केरोसिन स्टोव पर आसानी से काम चला लेते थे। कस्बों और गांवों मे तो यह बिल्कुल सामान्य बात थी कि घर में थोड़ा सा मिट्टी का तेल हमेशा रखा रहता था ताकि जरूरत पड़ने पर दिक्कत न हो। धीरे-धीरे नीतियां बदलीं और मिट्टी के तेल की आपूर्ति लगभग खत्म कर दी गई। पूरा ध्यान एलपीजी पर आ गया। निस्संदेह इसके पीछे साफ ईंधन को बढ़ावा देने और व्यवस्था को बेहतर बनाने की सोच रही होगी लेकिन इसके साथ साथ एक ऐसा विकल्प भी खत्म हो गया जो मुश्किल समय मे लोगों के काम आ सकता था।
आज अगर कहीं एलपीजी की सप्लाई थोड़ी भी प्रभावित होती है तो सीधे परेशानी खड़ी हो जाती है क्योंकि लोगों के पास दूसरा कोई आसान विकल्प नहीं बचा है।
मेरी व्यक्तिगत राय में किसी भी व्यवस्था मे एक से ज्यादा विकल्प बने रहना जरूरी होता है। अगर मिट्टी के तेल को पूरी तरह बंद करने के बजाय सीमित रूप मे ही जारी रखा जाता तो शायद आज की स्थिति इतनी असहज न होती। कभी-कभी पुरानी व्यवस्थाएं भले ही साधारण लगें लेकिन वक्त आने पर वही सबसे ज्यादा काम आती हैं।
