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लखनऊ : हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं के बेहतर उपचार हेतु चिकित्सकों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण! मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए जनपद स्तर पर सुदृढ़ पहल


लखीमपुर खीरी। जनपद में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय सभागार में उच्च जोखिम युक्त गर्भवती महिलाओं (एचआरपी) के उपचार एवं प्रबंधन पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीएमओ डॉ संतोष गुप्ता ने की।सीएमओ डॉ संतोष गुप्ता ने बताया कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए जनपद स्तर पर चिकित्सकों का यह विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया है। प्रशिक्षण में विभिन्न ब्लॉकों में तैनात चिकित्सा अधिकारियों को हाई रिस्क (उच्च जोखिम) गर्भवती महिलाओं की पहचान (एचआरपी चिन्हीकरण), समय पर उपचार, समुचित प्रबंधन एवं रेफरल सेवाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ये चिकित्सा अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यरत एएनएम एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को भी प्रशिक्षित करेंगे, जिससे जमीनी स्तर पर गर्भवती महिलाओं की बेहतर देखभाल सुनिश्चित हो सकेगी। इससे समय रहते जटिलताओं की पहचान कर उचित उपचार संभव हो पाएगा और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकेगी।प्रशिक्षण के दौरान गर्भवती महिलाओं में खून की कमी (एनीमिया) की पहचान एवं उपचार, संतुलित आहार एवं पोषण संबंधी परामर्श, प्रसव पूर्व आवश्यक जांच (एएनसी चेकअप), सुरक्षित एवं संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही जटिल मामलों के प्रबंधन एवं समय पर उच्च स्तरीय स्वास्थ्य संस्थानों को रेफर करने की प्रक्रिया पर भी विस्तार से चर्चा की गई।यह प्रशिक्षण राज्य स्तरीय प्रशिक्षकों डॉ यामिनी बादल एवं महिला रोग विशेषज्ञ डॉ अर्चना कुमारी व डॉ प्रमोद वर्मा द्वारा प्रदान किया गया। कार्यक्रम में एसीएमओ डॉ एसपी मिश्रा, एसीएमओ डॉ आरएम गुप्ता, डिप्टी सीएमओ डॉ प्रमोद वर्मा, डिप्टी सीएमओ डॉ अमित सिंह, डीपीएम अनिल यादव, डीएमएचसी लल्ला सिंह, जिला विशेषज्ञ (सामुदायिक स्वास्थ्य) अंशुमान पांडे सहित आईआईएचएमआर के राज्य स्तरीय प्रशिक्षक डॉ पुनीत सिंह पाल एवं अन्य स्वास्थ्य अधिकारी उपस्थित रहे।कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों से अपील की गई कि वे प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान को अपने कार्यक्षेत्र में प्रभावी ढंग से लागू करें, ताकि हर गर्भवती महिला को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

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