लखनऊ। नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर, लोधी रोड में “विकसित दिल्ली 2047” विषय पर एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन एवं पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम द ब्रिक्स एसोसिएशन ऑफ सिटीज एंड म्युनिसिपालिटीज तथा ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ लोकल सेल्फ गवर्नमेंट (।प्प्स्ैळ) द्वारा आयोजित किया गया। सम्मेलन में ब्रिक्स देशों से आए महापौरों, प्रतिनिधियों, शहरी विकास विशेषज्ञों, पत्रकारों और विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया और वर्ष 2047 तक विकसित भारत और विकसित शहरों के निर्माण की दिशा में व्यापक विचार-विमर्श किया। इस सम्मेलन में लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल भी सम्मिलित हुईं और शहरों के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।
इस अवसर पर राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजय के. रहाटकर, भुवनेश्वर की महापौर सुलोचना दास, इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव, बरेली के महापौर डॉ. उमेश गौतम, एनसीटी नई दिल्ली के विधायक डॉ. अनिल गोपाल, ।प्प्स्ैळ की मुख्य सलाहकार हंसा पटेल तथा संस्थान के निदेशक डॉ. जयराम पाठक सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
महापौर सुषमा खर्कवाल ने भी अपना वक्तव्य कहा कि अनुमान है कि वर्ष 2047 तक लखनऊ की आबादी डेढ़ करोड़ से अधिक हो जाएगी। इसी बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए शहर के योजनाबद्ध और दीर्घकालिक विकास की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में दिल्ली-एनसीआर की तर्ज पर “लखनऊ-एससीआर” विकसित किया जा रहा है, जिसमें लखनऊ और आसपास के जिलों को जोड़कर एक आधुनिक और सुव्यवस्थित शहरी क्षेत्र बनाया जाएगा।गोमती नदी को स्वच्छ और संरक्षित बनाने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। नदी में गिरने वाले अधिकांश नालों को टैप किया जा चुका है तथा शहर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स की संख्या बढ़ाई जा रही है। इसके साथ ही जीपीएस ट्रैकर से युक्त नावों के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 22 किलोमीटर लंबे नदी क्षेत्र की सफाई की जा रही है।जल प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए अमृत योजना के तहत शहर के सभी क्षेत्रों को सीवर लाइन से जोड़ने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। साथ ही कठौता झील जैसे जल भंडारण स्रोतों का विकास किया गया है, जिसकी जल भंडारण क्षमता लगभग 1230 मिलियन लीटर है।शहर से प्रतिदिन निकलने वाले लगभग 2000 मीट्रिक टन कचरे का वैज्ञानिक तरीके से शिवरी प्लांट में निस्तारण किया जा रहा है। शिवरी डंप साइट पर मौजूद लगभग 20 लाख मीट्रिक टन लेगेसी वेस्ट में से 17.5 लाख मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण किया जा चुका है।हरदोई रोड स्थित घैला क्षेत्र में कूड़े के पहाड़ को समाप्त कर “राष्ट्र प्रेरणा स्थल” विकसित किया गया है। इसके साथ ही शहर में 55 आधुनिक कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें से 20 स्थापित किए जा चुके हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री आदरणीय योगी आदित्यनाथ द्वारा लगभग 1519 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित ग्रीन कॉरिडोर परियोजना का उद्घाटन किया गया है, जिससे आउटर रिंग रोड से कनेक्टिविटी मजबूत हुई है और शहर के अंदर ट्रैफिक दबाव कम हुआ है।इसके साथ ही लखनऊ में 2000 से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों के माध्यम से डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण किया जा रहा है, जिससे प्रदूषण कम करने में मदद मिल रही है। गोमती नगर में लगभग 116 करोड़ रुपये की लागत से नगर निगम के नए मुख्यालय का निर्माण कराया जा रहा है।पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत शहर के विभिन्न वार्डों में मियावाकी पद्धति से शहरी वन विकसित किए जा रहे हैं और “नमो वन” का भी निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे संवाद सतत, समावेशी और स्मार्ट शहरों के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लखनऊ नगर निगम भविष्य के शहर के निर्माण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।
