प्रतापगढ़। जनपद प्रतापगढ- सामाजिक वानिकी वन एवं वन्य जीव प्रभाग, के जिला गंगा समितिध्पर्यावरण समिति द्वारा प्रभागीय निर्देशक श्री आशुतोष गुप्ता के निर्देषानुसार सदर रेंज के साकेत गल्र्स पी0जी0कालेज परिसर में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वनों के महत्व के प्रति जागरूकता फैलाना एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन व सरस्वती वंदना के साथ समाजसेवी रोशनलाल उमरवैश्य एवं समाजसेवी आलोक शुक्ला जी वृक्षारोपण कर एक पौध मां के नाम सभी को पौधारोपण करने की अपील की। इसी के साथ पक्षियों के संरक्षण के लिए घोंसले भी बांटे गए। जिसमें डीएफओ कार्यालय के अधिकारियों, महाविद्यालय प्रशासन एवं छात्राओं ने मिलकर विभिन्न प्रकार के पौधे लगाए। इस अवसर पर संस्थापक श्री अरविन्द कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि “वन हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं और इनके संरक्षण के बिना पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं है। कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित संगोष्ठी में वनों के संरक्षण, जैव विविधता एवं जलवायु परिवर्तन पर इसके प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई। एलायंस क्लब इंटरनेशनल डायरेक्टर समाज सेवी रोशनलाल उमरवैश्य ने बताया कि वनों की कटाई से पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है और इसे रोकना अत्यंत आवश्यक है। वन विभाग वह नगर पालिका के संयुक्त तत्वाधान में नदियों को प्रदूषण मुक्त करने का जो वीणा उठाया गया है यह बहुत ही सराहनीय है समाज सेवी आलोक शुक्ला जी ने कहा फ्लोटिंग बैरियर जागरूकता का बढ़ावा प्रतापगढ़ हर स्कूल कॉलेज में होना चाहिए और सभी जनमानस को जोड़कर नदियों को स्वच्छ रखने पर बल मिलेगा। विचार रखने वालों में नगर पालिका बेल्हा परिषद प्रतापगढ़ स्वास्थ मिशन के प्रभारी संतोष सिंह, समाजसेवी आलोक शुक्ला, रानीगंज, कुंडा, गड़वारा आदि के ईओ ने बालिकाओं को जागृत किया। इस अवसर पर वन विभाग द्वारा पौध वितरण भी किया गया प्रभागीय निदेशक कार्यालय ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। कार्यक्रम में उपस्थित प्रधनाचार्य महोदया, शिक्षकों एवं अतिथियों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसमें प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। कार्यक्रम के अंत में प्राचार्या ने डीएफओ कार्यालय, सदर रेंज, प्रतापगढ़ का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन छात्राओं में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने में सहायक होते हैं।
साकेत पीजी गल्र्स डिग्री कॉलेज, प्रतापगढ़ मे प्रभागीय निदेषक कार्यालय, सदर रेंज, प्रतापगढ़ द्वारा जल प्रदूषण नियंत्रण विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम नगर पालिका, प्रतापगढ़ के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें नदियों में कचरा रोकने के लिए प्लास्टिक की बेकार बोतलों से तैयार फ्लोटिंग बैरियर (तैरता अवरोध) के निर्माण एवं उपयोग का सफल प्रदर्शन किया गया। यह पहल पहले से चल रहे एक पायलट प्रोजेक्ट का विस्तार है, जिसे सई नदी में सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है। कार्यक्रम की मुख्य विशेषता रही फ्लोटिंग बैरियर के निर्माण का लाइव डेमोंस्ट्रेशन डा0 रूपेन्द कुमार यादव ने दिखाया और बताया कि किस प्रकार उपयोग में आ चुकी प्लास्टिक बोतलों को एकत्र कर उन्हें रस्सियों एवं जाल के माध्यम से जोड़कर एक तैरता हुआ अवरोध तैयार किया जा सकता है। यह बैरियर नदी या नाले में बहने वाले प्लास्टिक एवं अन्य ठोस कचरे को एक स्थान पर एकत्र करने में सहायक होता है, जिससे उसे आसानी से हटाया जा सकता है। इस तकनीक का प्रयोग क्षेत्र के कुछ जल स्रोतों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में किया गया था, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि “यह एक कम लागत वाली, पर्यावरण अनुकूल और प्रभावी तकनीक है, जिसे बड़े स्तर पर अपनाया जा सकता है। नगर पालिका, प्रतापगढ़ श्री संतोष कुमार सिंह ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह तकनीक शहर के नालों एवं जल स्रोतों को स्वच्छ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में इस प्रकार के नवाचारों को व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा। कार्यक्रम के अंतर्गत जल प्रदूषण के कारणों एवं दुष्प्रभावों पर भी विस्तार से चर्चा करते हुए समाजसेवी रोशनलाल उमरवैश्य ने कहा कि यह अनोखी पहल नदियों को स्वच्छ बनाने में मिल का पत्थर साबित होंगी। शिवम् यादव जिला परियोजना नमामि गंगे ने बताया कि औद्योगिक अपशिष्ट, घरेलू कचरा एवं प्लास्टिक प्रदूषण जल स्रोतों को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप न केवल जल की गुणवत्ता घट रही है, बल्कि जलीय जीवों का जीवन भी संकट में पड़ रहा है। कार्यक्रम के दौरान सभी ने जल स्रोतों को स्वच्छ रखने और प्रदूषण को रोकने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। यह कार्यक्रम जल प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ और फ्लोटिंग बैरियर जैसी नवाचारी तकनीक के माध्यम से स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश देने में सफल रहा।
