Type Here to Get Search Results !
BREAKING NEWS

उन्नावः चार दिवसीय इंटरनेशनल आर्बिट्रेशनरू द ग्लोबल ट्रेंड का हुआ शुभारंभ


उन्नाव। जनपद के नवाबगंज स्थित चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश में चार दिवसीय ष्इंटरनेशनल समिट 1.0 ऑन इंटरनेशनल आर्बिट्रेशनरू द ग्लोबल ट्रेंडष् का शुभारंभ हुआ। यह देश की पहली एआई ऑगमेंटेड निजी यूनिवर्सिटी है। इस अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में देश-विदेश से कानून विशेषज्ञ, शिक्षाविद, आर्बिट्रेशन प्रैक्टिशनर्स और कानून के छात्र बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं।समिट का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक विवादों के समाधान में मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) की बढ़ती भूमिका, नए वैश्विक रुझानों और भविष्य की संभावनाओं पर गहन विचार-विमर्श करना है।

उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, लखनऊ के कुलपति प्रो. डॉ. अमर पाल सिंह रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वैश्विक व्यापार के तेजी से विस्तार के साथ विवादों की संख्या भी बढ़ी है। ऐसे में आर्बिट्रेशन एक प्रभावी, तटस्थ और त्वरित विवाद समाधान प्रणाली के रूप में उभरा है।

प्रो. डॉ. सिंह ने जोर दिया कि श्विकसित भारतश् के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश में मजबूत और विश्वसनीय आर्बिट्रेशन सिस्टम का होना बेहद आवश्यक है।

कार्यक्रम की शुरुआत स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज के निदेशक के स्वागत भाषण से हुई। प्रो-वीसी रिसर्च प्रो. डॉ. सुसान एलियास ने छात्रों को वैश्विक कानूनी परिदृश्य को समझने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि आज के ग्लोबल बिजनेस एनवायरनमेंट में इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन तेज, निष्पक्ष और कम खर्च में विवाद समाधान का सशक्त माध्यम बन चुका है।

समिट के विभिन्न तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन के नए ट्रेंड्स, संस्थागत आर्बिट्रेशन, क्रॉस-बॉर्डर डिस्प्यूट्स और भारत की वैश्विक भूमिका जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने उल्लेख किया कि सिंगापुर और हांगकांग जैसे देश इस क्षेत्र में अग्रणी हैं, जबकि भारत के पास भी अपार संभावनाएं मौजूद हैं, बशर्ते सही नीतियां और प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हों।

सत्र के अंतिम चरण में प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए विशेषज्ञों से सीधे संवाद किया। प्रो. डॉ. अमर पाल सिंह ने इस दौरान कहा कि आर्बिट्रेशन केवल सैद्धांतिक विषय नहीं बल्कि एक प्रैक्टिकल स्किल है, जिसे मूट कोर्ट, नेगोशिएशन और एक्स्ट्रा-करिकुलर गतिविधियों के माध्यम से विकसित किया जा सकता है।गतिविधियों के माध्यम से विकसित किया जाना चाहिए। यह चार दिवसीय समिट छात्रों को अंतरराष्ट्रीय कानून की दुनिया से जोड़ने और उन्हें ग्लोबल करियर के लिए तैयार करने का एक प्रभावशाली मंच साबित हो रहा है।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Design by - Blogger Templates |