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पीलीभीतः जनसंवाद से भरोसे की बुनियाद, विकास के वादों की अग्निपरीक्षा! शोक संतप्त परिवार से मुलाकात, संवेदना और सहयोग का आश्वासन


पीलीभीत। लोकतंत्र की असली ताकत गांव की चैपाल में दिखाई देती है, जहां जनप्रतिनिधि सीधे जनता के बीच बैठकर उनकी पीड़ा सुनते हैं। लोकसभा क्षेत्र पीलीभीत से सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री (व्यापार एवं वाणिज्य) जितिन प्रसाद का बरखेड़ा विधानसभा क्षेत्र के गांवों में हालिया दौरा इसी संवाद परंपरा को मजबूत करने का प्रयास माना जा सकता है। टिकरी मंडल के नरायनपुर गांव में सड़क दुर्घटना में दो युवकों की असामयिक मृत्यु से शोकाकुल परिवार से मिलकर संवेदना प्रकट करना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधि की सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। ऐसे क्षणों में सहानुभूति और सहयोग का आश्वासन पीड़ित परिवार को मानसिक संबल देता है। सांसद का स्वागत बरखेड़ा विधायक स्वामी प्रवक्तानंद द्वारा गुलदस्ता और शॉल भेंट कर किया जाना राजनीतिक शिष्टाचार का परिचायक रहा। परंतु स्वागत-सत्कार से आगे बढ़कर जनता यह अपेक्षा रखती है कि संवाद में उठे मुद्दों का समाधान समयबद्ध रूप से धरातल पर दिखे।

टिकरी, अलखथान, प्रतापपुर, बस्थना और इघरा ग्राम पंचायतों में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रमों में ग्रामीणों ने अंत्येष्टि स्थल निर्माण, विद्युत प्रकाश व्यवस्था, सड़क सुधार और भट्टी हटाने जैसी मूलभूत समस्याएं उठाईं। ये वे मुद्दे हैं जो सीधे ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता से जुड़े हैं।

सांसद जितिन प्रसाद ने आश्वासन दिया कि अंत्येष्टि स्थल का निर्माण प्राथमिकता पर होगा, प्रकाश व्यवस्था सुधारी जाएगी और अन्य मांगों पर भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने प्रधानमंत्री छंतमदकतं डवकप के नेतृत्व में ‘विकसित भारत’ के संकल्प का उल्लेख करते हुए जनसहभागिता को आवश्यक बताया। यह सही है कि योजनाएं और संकल्प विकास की दिशा तय करते हैं, लेकिन उनकी सफलता स्थानीय स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन से ही संभव है। गांवों की समस्याएं अक्सर छोटी दिखाई देती हैं, परंतु उनका समाधान ही वास्तविक विकास की कसौटी होता है।

कार्यक्रम में विधायक स्वामी प्रवक्तानंद महाराज ने मुख्यमंत्री ल्वहप ।कपजलंदंजी के हालिया जापान और सिंगापुर दौरों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन यात्राओं से प्रदेश में निवेश और औद्योगिक विकास को गति मिली है। यह निस्संदेह प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। परंतु सवाल यह है कि इन वैश्विक प्रयासों का लाभ गांव की चैपाल तक कितनी शीघ्रता और प्रभावशीलता से पहुंचेगा। निवेश तभी सार्थक होगा जब रोजगार, आधारभूत संरचना और स्थानीय सुविधाओं में स्पष्ट सुधार दिखाई दे। पीलीभीत जैसे जनपदों के लिए यह अवसर है कि वे इन नीतिगत पहलों का लाभ उठाकर कृषि, लघु उद्योग और सेवा क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करें। जनसंवाद कार्यक्रम में अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिससे संगठनात्मक सक्रियता का संदेश गया। ग्रामीणों ने भी विकास की अपेक्षाएं खुलकर रखीं।

अब सबसे महत्वपूर्ण चरण हैं। आश्वासनों को परिणाम में बदलना। यदि अंत्येष्टि स्थल का निर्माण, प्रकाश व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाएं समयबद्ध तरीके से पूरी होती हैं, तो जनसंवाद केवल राजनीतिक कार्यक्रम न रहकर विश्वास की मजबूत नींव साबित होगा। बरखेड़ा और पीलीभीत की जनता विकास चाहती हैं। संकल्पों से आगे बढ़कर साकार परिणामों के रूप में। जनप्रतिनिधियों के लिए यही असली परीक्षा है, और यही लोकतंत्र की सार्थकता भी।

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