पीलीभीत। गजरौला कला क्षेत्र के ग्राम पिपरिया भजा में शांतिकुंज परिवार के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद् पावन प्रज्ञा पुराण कथा एवं नौ कुंडली गायत्री महायज्ञ का शुभारंभ अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लासपूर्ण वातावरण में हुआ। कार्यक्रम के प्रारंभ से पूर्व 151 कन्याओं द्वारा भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसने पूरे गांव को भक्तिमय रंग में रंग दिया।
कलश यात्रा में शामिल कन्याएं पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण किए हुए वैदिक मंत्रोच्चार और भजन-कीर्तन के बीच गांव की प्रमुख गलियों से गुजरीं। ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। गांव का वातावरण “गायत्री मंत्र” के उच्चारण से गूंज उठा। भ्रमण के उपरांत विधि-विधान के साथ वैदिक रीति से कलश स्थापना संपन्न कराई गई।आयोजकों ने बताया कि वर्ष 2026 में परम पूज्य पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य की तप साधना एवं परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में देशभर में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जा रही है। इसी क्रम में पिपरिया भजा में यह पावन आयोजन रखा गया है।कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को संस्कार निर्माण, युवा जागरण, नशा उन्मूलन और नैतिक मूल्यों के संवर्धन का संदेश दिया जाएगा। नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ में श्रद्धालुओं द्वारा आहुति देकर वातावरण शुद्धि, विश्व शांति और जनकल्याण की कामना की जा रही है।शांतिकुंज परिवार की ओर से लालता प्रसाद शास्त्री, लालाराम मौर्य, पी.एल. गंगवार, सर्वेश सिंह चैहान, अनिल कुमार शर्मा, हरिओम गंगवार, दीनदयाल, विनोद पांडे, कन्हैयालाल, ज्ञानवती शर्मा, ओमवती, ईश्वरी देवी, कुमार सेन मौर्य, सुखलाल, जानकी प्रसाद, डॉ. गिरजा शंकर, जयपाल कश्यप, महेश कश्यप, सत्य प्रकाश, नातथूलाल, राजा राम, रविंद्र, छत्रपाल, देवी दयाल, रामदास मौर्य, रामेश्वर दयाल, राजीव भारती, इतवारी लाल कश्यप, रामस्वरूप मौर्य, बुद्धसेन, शिवकुमार, कैलाश कश्यप सहित अनेक कार्यकर्ता आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं।ग्राम प्रधान रामसनेही ने भी कलश यात्रा में सहभागिता कर पुष्प वर्षा से स्वागत किया तथा श्रद्धालुओं के लिए जलपान की व्यवस्था कराई। कलश धारण करने वाली कन्याओं में कंचन मौर्य, रिंकी सक्सेना, शिवानी, मधु, शीतल, मंजू, संध्या, कविता देवी, अनुराधा मौर्य, नेहा, प्रियंका देवी, रूबी और पूनम प्रमुख रूप से शामिल रहीं।कलश स्थापना के उपरांत विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे गांव में भक्ति, श्रद्धा और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। यह आयोजन क्षेत्र में आध्यात्मिक जागरण और नैतिक मूल्यों के पुनर्स्थापन का सशक्त संदेश दे रहा है।
