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पीलीभीतः अनूप अग्रवाल बने सेवा का पर्याय गरीब बच्चों की पढ़ाई से लेकर अंतिम संस्कार तक निभा रहे जिम्मेदारी! कोरोना काल में घर-घर पहुंचाया था राशन, ऐसी ही सेवा आज भी जारी


पीलीभीत। तराई क्षेत्र और विश्वविख्यात पीलीभीत टाइगर रिजर्व की धरती पर समाजसेवा की जब भी चर्चा होती है, मोहल्ला कुवरगढ़ निवासी अनूप अग्रवाल का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। वर्षों से वे जरूरतमंदों के लिए निरूस्वार्थ भाव से कार्य कर रहे हैं। आज उनका नाम शहर ही नहीं, आसपास के जनपदों में भी सम्मान के साथ लिया जाता है।  अनूप अग्रवाल ने समाजसेवा को केवल दान तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे अपना कर्तव्य बनाया है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना, जरूरतमंद बालिकाओं के विवाह में आर्थिक सहयोग देना और निर्धन परिवारों की दैनिक जरूरतों में मदद करना उनकी नियमित सेवा का हिस्सा है। वे कई गरीब बच्चों को मुक्त शिक्षा दिलाने में भी सहयोग कर चुके हैं। परिवारों का कहना है कि उनकी मदद से कई बच्चों का भविष्य संवर सका है। कोरोना महामारी के दौरान जब लॉकडाउन लगा और लोग घरों में सीमित हो गए, तब अनूप अग्रवाल स्वयं आगे आए। उन्होंने शासन की गाइडलाइन का पालन करते हुए घर-घर जाकर राशन, दवाइयां और दैनिक उपयोग की सामग्री वितरित की। उस कठिन समय में उनकी सेवा ने सैकड़ों परिवारों को राहत पहुंचाई। समाजसेवा का दायरा केवल शहर तक सीमित नहीं है। जिला जेल में बंद महिलाओं, बुजुर्गों और किशोर बंदियों को सर्दी के मौसम में जैकेट, स्वेटर और कंबल वितरित करना उनकी वार्षिक पहल का हिस्सा है। इसके अलावा मानसिक रूप से अस्वस्थ और बेसहारा लोगों को आश्रय दिलाने में भी वे सक्रिय हैं। ऐसे कई लोगों को उन्होंने सहारा देकर अपना घर आश्रम, भरतपुर तक पहुंचाया, जहां उनके इलाज और देखभाल की व्यवस्था की गई। वे श्री साईं बाबा संस्थान, शिरडी के आजीवन सदस्य हैं तथा वृद्ध सेवा संस्थान पीलीभीत से भी जुड़े हैं। जरूरतमंद परिवारों के अंतिम संस्कार के लिए निरूशुल्क लकड़ी उपलब्ध कराना भी उनकी सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कई असहाय परिवारों को उन्होंने इस कठिन समय में आर्थिक और नैतिक संबल दिया है। वर्तमान में अनूप अग्रवाल उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल (पंजीकृत) के जिला अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। व्यापारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में उनकी सक्रियता उन्हें एक अलग पहचान देती है। शहर के लोगों का कहना है कि अनूप अग्रवाल ने यह साबित किया है कि समाजसेवा केवल शब्दों से नहीं, बल्कि निरंतर कर्म से सिद्ध होती है।

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