संग्रामपुर: हो गया खेल, धरातल पर दावे फेल! स्वच्छ भारत मिशन कागजों तक सीमित
February 05, 2026
संग्रामपुर/अमेठी। प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन के दावों को धरातल पर पलीता लगाया जा रहा है। अमेठी जिले के संग्रामपुर विकास खंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में साफ-सफाई की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। गंगापुर, अम्मरपुर और मड़ौली जैसी पंचायतों में नालियां गंदगी और कचरे से इस कदर अटी पड़ी हैं कि जल निकासी का नामोनिशान नहीं बचा है। ग्रामीणों का कहना है कि नालियों में कचरा, सिल्ट और खरपतवार जमा होने के कारण दूषित पानी सड़कों पर बह रहा है। यह स्थिति न केवल जरौटा ग्राम सभा, बल्कि क्षेत्र की अधिकांश पंचायतों में बनी हुई है। सफाई के अभाव में ये नालियां अब मच्छरों और संक्रामक रोगों का केंद्र बन चुकी हैं, जिससे स्थानीय निवासियों का जीना दूषित वातावरण में मुहाल हो गया है। स्थानीय निवासी नवीन, संतोष, कुलदीप, अयोध्या प्रसाद, दिनेश कुमार, महेश, अरुण, पवन और गोकुल ने प्रशासन के प्रति अपना कड़ा रोष व्यक्त किया। उन्होंने बताया हमने कई बार ग्राम प्रधान और सचिव से सफाई के लिए गुहार लगाई, लेकिन नतीजा सिफर रहा। अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण आज पूरा गांव नरकीय स्थिति मे रहने को मजबूर है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि संबंधित विभाग और पंचायत स्तर के जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं, जिसके कारण समस्या ने अब विकराल रूप ले लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीओ पंचायत लाल शशिकांत ने स्पष्ट किया है कि प्रकरण उनके संज्ञान में आ चुका है। उन्होंने आश्वासन देते हुए कहा सफाई कर्मचारियों की एक विशेष टीम को तत्काल प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जाएगा। नालियों की साफ - सफाई का कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण कराया जाएगा। लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों और उत्तरदायी व्यक्तियों पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। नियमों के अनुसार, ग्राम पंचायतों में साफ-सफाई सुनिश्चित करना पंचायत सचिव और प्रधान की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इस तरह की व्यापक लापरवाही न केवल वित्तीय संसाधनों के दुरुपयोग की ओर इशारा करती है, बल्कि आम नागरिकों के स्वास्थ्य के अधिकार का भी उल्लंघन है। अब देखना यह है कि प्रशासन का यह आश्वासन केवल खानापूर्ति बनकर रह जाता है या संग्रामपुर के ग्रामीणों को वास्तव में इस गंदगी से निजात मिलती है।
