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संग्रामपुरः आवारा कुत्तों का आतंक, खौफ मे लोग


संग्रामपुर/अमेठी। अमेठी जिले के भेटुआ विकास खंड में आवारा कुत्तों का खौफ इस कदर बढ़ गया है कि राहगीरों और ग्रामीणों का सड़कों पर निकलना दूषित हो गया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) भेटुआ के आंकड़े चैंकाने वाले हैं, जहाँ जनवरी महीने से ही कुत्ता काटने के मामलों में बेतहाशा वृद्धि दर्ज की गई है। अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार, जहां पहले रोजाना औसतन 2 से 4 मामले सामने आते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 25 से 30 प्रतिदिन हो गई है। गुरुवार को भी सीएचसी परिसर में एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाने वालों की लंबी कतारें देखी गईं, जो क्षेत्र में व्याप्त दहशत को बयां कर रही हैं। सीएचसी अधीक्षक डॉ. अभिमन्यु कुमार वर्मा ने इस अचानक आई तेजी का वैज्ञानिक कारण स्पष्ट किया है।  उन्होंने बताया भारत में आवारा कुत्तों का मुख्य प्रजनन काल अक्टूबर से दिसंबर होता है,मातृत्व सुरक्षा जनवरी-फरवरी में पिल्ले 8 से 12 सप्ताह के हो जाते हैं। इस दौरान मादा कुत्ता अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर अत्यधिक संवेदनशील और आक्रामक हो जाती है,यदि कोई राहगीर या बच्चा अनजाने में पिल्लों के करीब जाता है, तो मादा कुत्ता उसे खतरा मानकर रक्षात्मक हमला कर देती है।अस्पताल में एंटी-रेबीज वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। हम हर पीड़ित को तत्काल उपचार देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। डॉक्टरों ने ग्रामीणों को निम्नलिखित सावधानियां बरतने की सलाह दी है सड़कों पर घूमते कुत्तों और विशेषकर उनके पिल्लों से सुरक्षित दूरी बनाकर चलें।बच्चों को गलियों या सुनसान सड़कों पर अकेला न छोड़ें। सो रहे या खाना खा रहे कुत्तों को अचानक न छुएं और न ही उन्हें पत्थर मारें।यदि कुत्ता काट ले, तो घाव को तुरंत बहते पानी और साबुन से धोएं और बिना देरी किए अस्पताल जाकर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाएं।

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