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जिंदा शख्स की जिंदगी बनी नरक, डेथ सर्टिफिकेट हुआ जारी, अधिकारियों के चक्कर काटने पर हुआ मजबूर


यूपी के कानपुर में एक बार फिर सरकारी सिस्टम की लापरवाही ने एक जिंदा इंसान की जिंदगी को नर्क बना दिया है। यहां कानपुर के गोविंद नगर क्षेत्र के निराला नगर निवासी गौरव साहू नामक युवक को स्वास्थ्य विभाग ने 12 सितंबर 2025 को मृत घोषित कर डेथ सर्टिफिकेट जारी कर दिया। बताते चलें कि असल में गौरव जिंदा हैं और गौरव लावारिश मरीजों की मदद करते हुए उनके अंतिम संस्कार का जिम्मा उठाते हैं, लेकिन एक छोटी-सी गलती ने उन्हें कागजों पर 'मुर्दा' बना दिया। इस घटना ने पूरे शहर में हंगामा मचा दिया है और लोगों में सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

गौरव साहू बताते हैं कि वे सामाजिक कार्य में सक्रिय रहते हैं। वे अक्सर अस्पतालों में लावारिश मरीजों को भर्ती करवाते हैं और उनकी मौत होने पर उनका अंतिम संस्कार भी करवाते हैं। इसी क्रम में 7 सितंबर 2025 को उन्होंने एक लावारिश मरीज को मुरारी लाल चेस्ट हॉस्पिटल में एडमिट करवाया था। दुर्भाग्य से उस मरीज की मौत 12 सितंबर को हो गई। गौरव ने उस लाश का अंतिम संस्कार किया, लेकिन अस्पताल की लापरवाही के चलते मृतक के रिकॉर्ड में उनका आधार कार्ड नंबर गलत तरीके से दर्ज हो गया। डॉक्टरों या स्टाफ ने गलती से गौरव साहू को ही मृत घोषित कर दिया और डेथ सर्टिफिकेट जारी कर दिया।

इस गलती का असर जनवरी 2026 में सामने आया, जब गौरव राशन कार्ड से राशन लेने गए तो उनका नाम कट चुका था। बैंक अकाउंट से पैसे निकालने की कोशिश की तो अकाउंट ब्लॉक मिला। आधार कार्ड चेक करने पर पता चला कि वह इनवैलिड हो चुका है। ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज भी रिजेक्ट होने लगे। हैरान-परेशान गौरव ने जांच की तो चौंकाने वाली जानकारी मिली उन्हें जीवित होते हुए भी आधिकारिक रूप से मृत घोषित कर दिया गया है।

जब गौरव ने अस्पताल पहुंचकर मामले की जानकारी अस्पताल प्रशासन को दी और सुधार की मिन्नतें की तो गौरव के अनुसार अस्पताल ने हाथ खड़े कर दिए और कहा, "ये हमारे बस में नहीं है।" अब गौरव एक महीने से अधिक समय से विभिन्न विभागों के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय में शिकायती पत्र दिया, जिसमें लिखा कि मुरारी लाल चेस्ट हॉस्पिटल की लापरवाही से उन्हें मृत घोषित किया गया है। इससे उनका आधार UID इनवैलिड हो गया और वे सभी सरकारी सुविधाओं से वंचित हो गए हैं। सीएमओ ने 23 फरवरी को उन्हें एक कैंसिलेशन फॉर्म दिया, जिसे सभी संबंधित विभागों में जमा करना होगा ताकि रिकॉर्ड सुधारा जा सके।

यह पहला मामला नहीं है जहां कानपुर में जिंदा व्यक्ति को मृत घोषित किया गया हो। कुछ महीने पहले जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के हैलट अस्पताल में भी ऐसा ही हादसा हुआ था। वहां एक लावारिश बुजुर्ग की मौत हुई, लेकिन जूनियर डॉक्टरों ने गलती से पड़ोस के बेड पर भर्ती जिंदा मरीज विनोद को मृत घोषित कर दिया। पुलिस को सूचना मिली, पोस्टमॉर्टम की तैयारी शुरू हुई, लेकिन बेड पर पहुंचकर पता चला कि मरीज जिंदा है। इस मामले में डिप्टी सीएम के निर्देश पर तीन कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया था।

गौरव साहू ने वीडियो जारी कर अधिकारियों से गुहार लगाई है कि जल्द से जल्द उनका रिकॉर्ड सुधारा जाए। उन्होंने कहा, "मैं दूसरों की मदद करता हूं, लेकिन सिस्टम ने मुझे ही मार डाला। अब बैंक, राशन, योजना सब बंद हो गए हैं।" यह घटना प्रशासनिक सुस्ती और डेटा एंट्री में लापरवाही को उजागर करती है, जहां एक छोटी गलती किसी की पूरी जिंदगी बर्बाद कर सकती है।

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