आगरा। जनपद आगरा के मौजा वुढेरा, तहसील व जिला आगरा स्थित खसरा नंबर 32 मि की बेशकीमती भूमि को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। राजस्व अभिलेखों के अनुसार फसली 1420 में यह भूमि आगरा विकास प्राधिकरण की संपत्ति के रूप में दर्ज थी, लेकिन बाद की खतौनी (1426दृ1431) में कई निजी व्यक्तियों और कंपनियों के नाम भू-स्वामी के रूप में दर्ज पाए गए हैं।
शिकायतकर्ता रवि गाँधी ने आरोप लगाया है कि सरकारी भूमि पर निजी नाम दर्ज होना सीधे-सीधे राजस्व विभाग और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत की ओर इशारा करता है। लगभग दो माह पूर्व स्पीड पोस्ट के माध्यम से प्रेषित शिकायत पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने से अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
बताया गया है कि उक्त भूमि पर नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया, दाखिल-खारिज के नियमों और अनुमति संबंधी दस्तावेजों की पारदर्शिता संदिग्ध है। आरोप है कि करोड़ों रुपये के स्टाम्प शुल्क की चोरी कर राज्य सरकार को राजस्व हानि पहुंचाई गई है। इसके अलावा यह भी प्रश्न उठाया गया है कि यदि भूमि प्राधिकरण की थी तो उस पर नामांतरण किस आधार पर और किन अधिकारियों की संस्तुति से किया गया।
शिकायत में यह भी मांग की गई है कि उक्त भूमि पर सौंदर्यीकरण या अन्य कार्यों में यदि धनराशि व्यय हुई है, तो उसकी मदवार जानकारी सार्वजनिक की जाए।
मामले को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष एवं आगरा से बाहर की किसी स्वतंत्र सरकारी जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग की गई है, ताकि तथ्यों का खुलासा हो सके और यदि किसी स्तर पर अनियमितता या भ्रष्टाचार पाया जाए तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे जनमानस में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या वास्तव में सरकारी जमीन पर बड़ा खेल हुआ है, या फिर यह महज अभिलेखीय त्रुटि है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन रवि गाँधी की शिकायत के गंभीर आरोप पर क्या रुख अपनाता है।
