प्रतापगढःदलहनी एवं तिलहनी फसलों को कीटों से बचाने के लिए समय पर करें बचाव-अशोक कुमार
February 21, 2026
प्रतापगढ़। जिले में जिला कृषि रक्षा अधिकारी अशोक कुमार ने शनिवार को किसान भाइयों को रबी की दलहनी एवं तिलहनी फसलों में कीट एवं रोग नियंत्रण के लिए समय से प्रभावी उपाय अपनाने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि वर्तमान मौसम में चना, मटर और सरसों की फसलों पर विभिन्न कीट एवं रोगों का प्रकोप बढ़ सकता है, जिससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका रहती है। उन्होंने जानकारी दी कि चना एवं मटर की फसल में सेमीलूपर कीट के नियंत्रण के लिए क्यूनालफास 25 प्रतिशत ईसी या मैलाथियान 50 प्रतिशत ईसी की 2 लीटर मात्रा को 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। चना की फसल में फली छेदक कीट के नियंत्रण हेतु एनपीवी (एच) 2 प्रतिशत एएस 250-300 मिलीलीटर अथवा क्यूनालफास 25 प्रतिशत ईसी या मैलाथियान 50 प्रतिशत ईसी की निर्धारित मात्रा को पानी में घोलकर छिड़काव करना लाभकारी रहेगा। सरसों की फसल में माहू के प्रकोप से बचाव के लिए डाइमेथोएट 30 प्रतिशत ईसी अथवा क्लोरोपायरीफास 20 प्रतिशत ईसी 1.200 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 600-750 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। वहीं मटर की फसल को बुकनी रोग से बचाने के लिए घुलनशील गंधक 80 प्रतिशत (2 किग्रा) या ट्राइकोडर्मा 2.5 किग्रा पाउडर को 500-750 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की अनुशंसा की गई है। अधिकारी ने किसानों से अपील की कि दवा का प्रयोग सावधानी और विशेषज्ञ की सलाह से ही करें। समय पर कीट एवं रोग नियंत्रण से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित की जा सकती है।
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