पीलीभीत। मानवदृवन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के बीच बरखेड़ा क्षेत्र में घटी एक दर्दनाक घटना ने पूरे जनपद को झकझोर दिया है। 128 विधानसभा क्षेत्र बरखेड़ा के संजय नगर कॉलोनी (महोफ कॉलोनी) में बाघ के हमले में पारुल राय की असामयिक मृत्यु से जहां परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, वहीं क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता भी उभरकर सामने आई है।यह घटना केवल एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि उन ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों की संवेदनशील हकीकत को भी उजागर करती है जो वन क्षेत्र के समीप बसे हैं और जहां मानवदृवन्यजीव संघर्ष लगातार चुनौती बनता जा रहा है। घटना की सूचना मिलते ही बरखेड़ा विधायक एवं महामंडलेश्वर स्वामी प्रवक्तानंद पीड़ित परिवार के आवास पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त की और दुख की इस घड़ी में हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। विधायक का यह दौरा केवल औपचारिक शोक-संवेदना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर राहत और सुरक्षा से जुड़े बिंदुओं पर भी चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शासन और प्रशासन पीड़ित परिवार के साथ पूरी संवेदनशीलता के साथ खड़ा है और भविष्य में भी हर आवश्यक सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
प्रदेश सरकार की ओर से स्वीकृत 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि पीड़ित परिवार के खाते में हस्तांतरित की गई। इस दौरान एसडीएम श्रद्धा सिंह और कानूनगो रमेश की उपस्थिति में सहायता प्रमाणपत्र परिवार को सौंपा गया।हालांकि आर्थिक सहायता किसी प्रियजन की क्षति की भरपाई नहीं कर सकती, लेकिन कठिन समय में यह परिवार के लिए एक महत्वपूर्ण संबल सिद्ध होती है। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ने यह संदेश दिया कि आपदा की स्थिति में राहत प्रक्रिया को गंभीरता से लिया जा रहा है।
बरखेड़ा क्षेत्र पीलीभीत जनपद के उस हिस्से में आता है जो पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रभाव क्षेत्र में माना जाता है। बीते कुछ वर्षों में वन्यजीवों की गतिविधियां मानव बस्तियों के समीप बढ़ी हैं, जिससे ऐसी घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि घटते वन क्षेत्र, बदलते भू-परिदृश्य और बढ़ती आबादी के कारण वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास प्रभावित होता है, जिसके चलते वे भोजन या आश्रय की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख करते हैं। स्वामी प्रवक्तानंद ने इस संदर्भ में कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए दीर्घकालिक और ठोस रणनीति आवश्यक है। उन्होंने वन विभाग और स्थानीय प्रशासन से निगरानी तंत्र को और सुदृढ़ करने, प्रभावित क्षेत्रों में नियमित गश्त बढ़ाने तथा ग्रामीणों को जागरूक करने की आवश्यकता पर बल दिया। विधायक ने सुझाव दिया कि वन्यजीव प्रभावित क्षेत्रों में सीसीटीवी निगरानी, चेतावनी बोर्ड, रात्रि गश्त और आपातकालीन हेल्पलाइन को और प्रभावी बनाया जाए। साथ ही, ग्राम स्तर पर जागरूकता बैठकों का आयोजन कर लोगों को यह बताया जाए कि वन्यजीवों की गतिविधि की स्थिति में क्या सावधानियां बरतनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से यह भी कहा कि वन्यजीव हमलों की स्थिति में त्वरित राहत और चिकित्सा सहायता की व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।
दौरे के दौरान बबलू कश्यप, युगल वर्मा, ग्राम प्रधान नरेश और विश्वजीत डे सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की और परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
इस सामूहिक उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि संकट की घड़ी में समाज पीड़ित परिवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।
बरखेड़ा की यह घटना एक व्यापक चेतावनी भी है कि विकास, मानव बसावट और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाए बिना सुरक्षित सह-अस्तित्व संभव नहीं है। प्रशासन, वन विभाग और स्थानीय समुदायों के समन्वित प्रयासों से ही ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सकता है। पारुल राय की असामयिक मृत्यु क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। हालांकि इस दुखद घड़ी में प्रशासनिक तत्परता और नेतृत्व की संवेदनशील उपस्थिति ने परिवार को कुछ हद तक संबल अवश्य प्रदान किया है।
यह घटना हमें यह भी याद दिलाती है कि संवेदनशील नेतृत्व केवल शब्दों से नहीं, बल्कि त्वरित और ठोस कार्रवाई से पहचाना जाता हैं। और बरखेड़ा में दिखाई गई यह पहल उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
