पीलीभीत। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), उत्तर प्रदेश के अंतर्गत कार्यरत संविदा कार्मिकों ने अपनी विभिन्न लंबित समस्याओं को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। कार्मिकों का कहना है कि वर्षों से प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में अहम भूमिका निभाने के बावजूद उन्हें वेतन विलंब, सेवा असुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा के अभाव जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।संविदा कर्मियों ने कहा कि कोविड काल में उन्होंने अग्रिम पंक्ति में रहकर टीकाकरण अभियान, मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, आपातकालीन स्वास्थ्य प्रबंधन और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके बावजूद दीपावली 2025 से वेतन भुगतान में लगातार विलंब हो रहा है। उनका आरोप है कि ैछ।-मैच्।त्ैभ् प्रणाली में तकनीकी बाधाओं के चलते समय पर भुगतान नहीं हो पा रहा, जिससे हजारों परिवार आर्थिक संकट में हैं। उन्होंने मांग की है कि प्रत्येक माह की 3 तारीख से पूर्व वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाए तथा लंबित वेतन का शीघ्र निस्तारण किया जाए।कर्मियों ने प्रदेश के कुल बजट का न्यूनतम 9 से 10 प्रतिशत हिस्सा स्वास्थ्य क्षेत्र को आवंटित करने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचा ही राज्य की प्रगति का आधार है। उन्होंने उदाहरण देते हुए केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों का उल्लेख किया, जहां स्वास्थ्य क्षेत्र में बजट आधारित मॉडल से सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
10 वर्ष या उससे अधिक समय से सेवा दे रहे कर्मियों के नियमितीकरण की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई। प्रतिनिधिमंडल ने प्च्भ्ै मानकों के अनुरूप नए पद सृजित कर अनुभवी कार्मिकों को प्राथमिकता के आधार पर समायोजित करने की मांग की। साथ ही स्पष्ट और पारदर्शी वेतन नीति लागू कर वेतन विसंगतियों को दूर करने की आवश्यकता बताई।ज्ञापन में स्वास्थ्य बीमा, ईपीएफ, ग्रेच्युटी जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराने, वार्षिक एग्रीमेंट व्यवस्था समाप्त करने तथा दीर्घकालीन संविदा प्रणाली लागू करने की मांग भी शामिल रही। सेवा प्रदाता कंपनियों के माध्यम से कार्यरत कार्मिकों को स्वास्थ्य समिति या आउटसोर्स सेवा निगम में समाहित करने की बात भी कही गई।
इस संबंध में संविदा कर्मियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। जिला अध्यक्ष शेर सिंह चैहान के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा जताई। ज्ञापन सौंपने के दौरान अमरेश कुमार, अनामिका श्रीवास्तव, अमित कुमार, डॉ. देवेश गिरी, डॉ. बीडी पांडे सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।संविदा कर्मियों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करना है। उनका कहना है कि यदि कार्मिकों को सुरक्षा और सम्मान मिलेगा, तो स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक प्रभावी ढंग से संचालित हो सकेंगी।
