पीलीभीतः नेशनल हाईवे पर टूटा डिवाइडर बना मौत का कारण, पिज्जा डिलीवरी बॉय की बाइक टकराई, दो युवक गंभीर घायल! गजरौला कला में अंधेरा और बदहाली बनी जानलेवा, हर साल कई लोग घायल, दर्जनों की जा चुकी है जान
February 02, 2026
पीलीभीत। गजरौला कला क्षेत्र में नेशनल हाईवे पर बना टूटा हुआ डिवाइडर लगातार हादसों का कारण बनता जा रहा है। आदर्श किसान इंटर कॉलेज के पास एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। पिज्जा डिलीवरी कर वापस लौट रहे दो युवक अंधेरे में हाईवे पर बने क्षतिग्रस्त डिवाइडर से टकरा गए, जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए।हादसा इतना भीषण था कि बाइक चालक टक्कर के बाद काफी दूर तक सड़क पर घिसटता चला गया। आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल घायलों को सड़क से उठाकर उपचार के लिए अस्पताल भिजवाया। घायलों की पहचान विक्रम और उसके साथी हर्षित के रूप में हुई है। दोनों युवक रोजगार के सिलसिले में पिज्जा डिलीवरी का काम करते हैं और काम समाप्त कर घर लौट रहे थे। अंधेरे में डिवाइडर का टूटा हुआ कोना दिखाई न देने के कारण उनकी बाइक उससे जा टकराई।स्थानीय लोगों का कहना है कि इस स्थान पर नेशनल हाईवे का डिवाइडर लंबे समय से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हालत में है। न तो डिवाइडर पर कोई चेतावनी संकेत या रिफ्लेक्टर लगे हैं और न ही स्ट्रीट लाइटों की कोई व्यवस्था है। गजरौला कस्बा क्षेत्र में लगभग एक किलोमीटर तक हाईवे की यही स्थिति बनी हुई है, जहां संकेत चिन्ह टूटे पड़े हैं और स्ट्रीट लाइटें महीनों से बंद हैं।स्थानीय निवासियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हर साल इस जानलेवा डिवाइडर की वजह से कई लोग गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं, जबकि दर्जनों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके बावजूद संबंधित विभाग और प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। बार-बार शिकायतों और हादसों के बाद भी न तो डिवाइडर की मरम्मत कराई गई और न ही अस्थायी सुरक्षा इंतजाम किए गए।लोगों का कहना है कि यदि समय रहते डिवाइडर को दुरुस्त कर दिया जाए, उस पर रिफ्लेक्टर और संकेत चिन्ह लगाए जाएं तथा स्ट्रीट लाइटों को चालू किया जाए, तो कई जानें बचाई जा सकती हैं। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के चलते नेशनल हाईवे आम जनता के लिए मौत का रास्ता बनता जा रहा है।ताजा हादसे के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही हाईवे की बदहाल स्थिति को ठीक नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अब सवाल यह उठता है कि आखिर कितनी और जानें जाने के बाद प्रशासन इस जानलेवा डिवाइडर की ओर ध्यान देगा।
