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लखनऊ: उत्तर प्रदेश अपने कैंसर इकोसिस्टम को बेहतर बना रहा है-अमित कुमार घोष


लखनऊ। विश्व कैंसर दिवस पर एकीकृत स्वास्थ्य एवं कल्याण (प्भ्ॅ) काउंसिल द्वारा आयोजित 7वें कैंसर शिखर सम्मेलन एवं पुरस्कार 2026 मेउत्तर प्रदेश ने कैंसर देखभाल को मजबूत करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के अपने समर्पण को और दृढ़ किया। इस कार्यक्रम में राज्य सरकार की तरफ से उत्तर प्रदेश सरकार में मेडिकल हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर एंड मेडिकल एजुकेशन के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी अमित कुमार घोष उपस्थित हुए। उन्होंने मुख्य अतिथि के तौर पर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। पेशेंट एडवोकेसी और साक्ष्य-आधारित बातचीत में प्भ्ॅ काउंसिल के लगातार काम की सराहना करते हुए अमित कुमार घोष ने कहा कि ऐसे मंच नीतियों के उद्देश्यों को धरातल पर उतारने के लिए बहुत जरूरी होते हैं। उन्होंने पहली बार केंद्रीय स्वास्थ्य बजट का ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा होना एक ष्महत्वपूर्ण पलष् बताया। यह बजट हेल्थकेयर को आर्थिक विकास, सामाजिक समानता और इंडिया/2047 विजन के ड्राइवर के तौर पर स्थापित करता है।

अमित घोष ने अपने भाषण में कहा,”उत्तर प्रदेश एपिसोडिक कैंसर देखभाल से हटकर एक प्रणाली संचालित, रोकथाम और तकनीक-सक्षम मॉडल की ओर बढ़ रहा है जो हर जिले तक पहुंचेगा। हमने सरकारी मेडिकल कॉलेजों और कैंसर संस्थानों का तेजी से विस्तार किया है, आबादी के आधार पर स्क्रीनिंग को मजबूत किया है। हम लोगों के घरों के करीब इलाज पहुँचाने के लिए पूरे राज्य में डेडिकेटेड कैंसर डे-केयर सेंटर बना रहे हैं। आयुष्मान भारत, डिजिटल हेल्थ पहलों और मजबूत सरकारी-प्राइवेट साझेदारी के जरिए हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हर मरीज को, चाहे वह कहीं भी रहता हो या उसकी आय कितनी भी हो, समय पर निदान, किफायती इलाज और सम्मानजनक मरीज-केंद्रित कैंसर देखभाल मिल सके।”

उत्तर प्रदेश के बदलाव पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि सरकार ने मेडिकल कॉलेज की संख्या 9 से बढ़कर 43 की है। इससे ऑंकोलॉजी सेवाओं को और मजबूती मिली है और राज्य में रिसर्च क्षमता और ट्रेनिंग में बढ़ोतरी हुई है। उत्तर प्रदेश अपने कैंसर इकोसिस्टम को लखनऊ में जेके सिंघानिया कैंसर इंस्टिट्यूट और कल्याण सिंह सुपर स्पेशलिटी कैंसर इंस्टीट्यूट के जरिए बेहतर बना रहा है। कैंसर की जल्दी पहचान के लिए आबादी आधारित जांच इस प्रयास को नई गति दे रही है। रोकथाम और तकनीक पर जोर देते हुए उन्होंने बताया कि तंबाकू सेवन के नियंत्रण उपाय और उत्तर प्रदेश में युवा लड़कियों में भ्च्ट वैक्सीनेशन लगाने के फोकस से अब भविष्य में कैंसर का बोझ कम हो सकेगा। उन्होंने एडवांस्ड डायग्नोस्टिक्स, लिक्विड बायोप्सी, ।प् और पर्सनलाइज्ड मेडिसिन की भूमिका पर भी जोर दिया, और कहा कि ष्इनोवेशन को हमेशा किफायती और समानता के साथ संतुलित किया जाना चाहिए।”विश्वास, सम्मान, उपलब्धता और परिणाम सभी नीतियों के केंद्र में रहने चाहिए, इसी बात को दोहराते हुए अमित घोष ने मांग की कि अंतिम छोर तक के मरीजों को ऑंकोलॉजी सेवा मिलने के लिए सरकारी और प्राइवेट साझेदारी की आवश्यकता है। उन्होंने नीतियां बनाने वालों, डॉक्टरों और प्भ्ॅ काउंसिल के साथ साझेदारी में अगले दो महीनों में लखनऊ में एक राष्ट्रीय कैंसर डायलॉग आयोजित करने का प्रस्ताव रखा ताकि उत्तर प्रदेश के कैंसर नियंत्रण रोड मैप और जानकारी को दूसरे राज्यों के साथ भी साझा किया जा सके। इस समिट का समापन पूरे भारत में कैंसर देखभाल को ज्यादा आसान, किफायती और मरीज केंद्रित बनाने के आह्वान के साथ हुआ। चर्चाओं में लगातार निवेश, रोकथाम और जल्दी पता लगाने, टेक्नोलॉजी-आधारित सेवाओं और मजबूत सरकारी-प्राइवेट साझेदारी की जरूरत पर जोर दिया गया। कुल मिलाकर 7वें कैंसर समिट और अवॉर्ड्स ने कैंसर के खिलाफ लड़ाई में सरकार, डॉक्टरों, इंडस्ट्री, सिविल सोसाइटी और मरीजों के ग्रुप के बीच बेहतर सहयोग के लिए मंच तैयार किया।

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