सुलतानपुर। जिलाधिकारी आवास के पीछे बड़ैयाबीर मोहल्ले में कथित तौर पर रास्ता अवरुद्ध किए जाने का मामला प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। ईंटों का ढेर, मिट्टी का टीला और खड़ी की गई अस्थायी दीवारनुमा संरचना से रास्ता संकरा होने की ’शिकायत के बावजूद अब तक बुलडोजर कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े कर रहा है।’
शिकायत मिलते ही उप जिलाधिकारी (सदर) विपिन द्विवेदी के निर्देश पर नायब तहसीलदार सदर दुर्गेश यादव ने लेखपाल व कानूनगो को मौके पर जाकर पैमाइश और रिपोर्ट देने के आदेश दिए। प्रशासन का कहना है कि राजस्व अभिलेखों, खतौनी और नक्शे के आधार पर निष्पक्ष जांच कर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब अन्य मामलों में अवैध अतिक्रमण पर त्वरित बुलडोजर चलता है, तो डीएम आवास के पीछे के इस मामले में अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?क्या जांच प्रक्रिया लंबित है?क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति का दबाव है?या फिर मामला निजी भूमि विवाद का रूप ले चुका है?
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 67 के तहत यदि सार्वजनिक भूमि या रास्ते पर अवैध कब्जा पाया जाता है तो बेदखली और जुर्माना दोनों का प्रावधान है। साथ ही उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता नियमावली, 2016 के तहत नोटिस, सुनवाई और पैमाइश के बाद ही बलपूर्वक हटाने की कार्रवाई की जाती है।
यानी बिना प्रक्रिया पूरी किए सीधी बुलडोजर कार्रवाई कानूनी चुनौती झेल सकती है।
सूत्रों के अनुसार, राजस्व टीम द्वारा पैमाइश रिपोर्ट तैयार की जा रही है। रिपोर्ट के आधार पर ही तय होगा कि रास्ता सार्वजनिक है या निजी भूमि का हिस्सा। यदि सार्वजनिक मार्ग अवरुद्ध पाया गया तो हटाने की कार्रवाई में देर नहीं की जाएगी।
मामला संवेदनशील स्थान से जुड़ा है। ऐसे में लोगों की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। सवाल सिर्फ एक क्या रिपोर्ट आने के बाद सचमुच बुलडोजर चलेगा, या मामला’ ’कागजों में ही उलझकर रह जाएगा?’
अब देखना यह है कि जांच पूरी होते ही प्रशासन कितनी तत्परता दिखाता है और आमजन को राहत कब मिलती है।
