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सुल्तानपुर: प्रशासन के विरोध में सड़क पर उतरे किसान, पेराई बंद होने पर आक्रोश


जयसिंहपुर। बिना पूर्व सूचना के केन कमिश्नर के आदेश पर किसान सहकारी चीनी मिल में गन्ना पेराई का कार्य बंद किए जाने से किसानों में भारी रोष फैल गया। मंगलवार शाम पेराई बंद होने की सूचना मिलते ही गन्ना लेकर पहुंचे किसान भड़क उठे। बुधवार को किसानों ने चीनी मिल परिसर के बगल लखनऊ बलिया राजमार्ग के किनारे प्रदर्शन शुरू कर दिया।

किसानों के समर्थन में समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक अरुण वर्मा और भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट के पदाधिकारी भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। पूर्व विधायक अरुण वर्मा ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार किसान विरोधी नीतियां अपना रही है और सरकारी संस्थाओं को निजी हाथों में सौंपने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री किसानों के हित में चीनी मिल को नहीं बचा सकते तो उन्हें पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। सपा सरकार बनने पर नई चीनीमिल की स्थापना की जाएगी। चीनी मिल के प्रधान प्रबंधक अंजली गंगवार का कहना था कि केन कमिश्नर के आदेश पर हैदरगढ़ चीनी मिल को किसानों के गन्ने उनके द्वारा लगाए गए तौल कांटे से की जाएगी और इसके बाद गन्ना हैदरगढ़ भेजा जाएगा। प्रशासन का कहना है कि शासन से स्पष्ट आदेश मिलने के बाद अब पेराई शुरू नही की जा सकती है। वहीं किसानों का आरोप है कि इस तरह अचानक मिल बंद किए जाने से अगले वर्ष मिल के संचालन पर संकट खड़ा हो जाएगा। किसानों ने आशंका जताई कि हैदरगढ़ चीनी मिल उनके गन्ने की घटतौली करेगी और वहां प्रति कुंतल 12 रुपये कम मूल्य मिलेगा। प्रदर्शन कर रहे करीब 300 किसानों ने मांग की कि मिल परिसर में खड़ी ट्रालियों के गन्ने की यहीं तौल कर पेराई की जाए। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश सचिव अजय सिंह, जिलाध्यक्ष राम विशाल मौर्य और वरिष्ठ उपाध्यक्ष चैधरी देवशरण वर्मा ने जिलाधिकारी के नाम संबोधित ज्ञापन तहसीलदार सदर को सौंपते हुए चेतावनी दी कि यदि गन्ने की पेराई शीघ्र शुरू नहीं की गई तो आंदोलन उग्र किया जाएगा। दोपहर बाद एसडीएम विपिन द्विवेदी किसानों से वार्ता करने पहुंचे, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। मौके पर सुरक्षा व्यवस्था के तहत गोसाईगंज थानाध्यक्ष राम आशीष उपाध्याय पुलिस बल और एक अग्निशमन वाहन के साथ मौजूद थे। शाम छह बजे तक किसानों और प्रशासन के बीच बातचीत जारी थी। किसान अपनी बात पर अड़े हुए थे। इस दौरान संतराम वर्मा, सतबीर वर्मा, विजय वर्मा सहित सैकड़ों की संख्या में गन्ना किसान मौजूद थे।

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