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बाराबंकी: जिले में मध्यस्थता अभियान 2.0 को लेकर मंथन! न्याय को इंसानियत से जोड़ने की पहल


बाराबंकी । न्याय को सरल, सुलभ और त्वरित बनाने की दिशा में एक और सार्थक कदम उठाते हुए राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 2.0” एवं राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन को लेकर जनपद स्तर पर गंभीर और सक्रिय प्रयास किए जा रहे हैं। इसी को लेकर जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण,  प्रतिमा श्रीवास्तव के दिशा-निर्देशन में बुधवार को एक महत्वपूर्ण विचार-विमर्श बैठक का आयोजन किया गया।प्रधान न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय के विश्राम कक्ष में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता वंदना सिंह( प्रथम) ने की, जबकि बैठक का संचालन शिवानी रावत, सिविल जज सीनियर डिवीजनध्सचिव (पूर्णकालिक), जिला विधिक सेवा प्राधिकरण,  द्वारा किया गया। बैठक में नालसा एवं सालसा की गाइडलाइन के अनुरूप अधिक से अधिक मामलों के चिन्हांकन एवं निस्तारण को लेकर गहन चर्चा की गई।इस मौके पर  अल्पना सक्सेना, पीठासीन अधिकारी, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण की उपस्थिति भी रही। विचार-विमर्श के दौरान यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि सुलह-समझौता योग्य वैवाहिक विवादों तथा मोटर दुर्घटना से संबंधित अधिक से अधिक मामलों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को संदर्भित किया जाए, ताकि लोक अदालत एवं मध्यस्थता के माध्यम से इनका शीघ्र, सहज और प्रभावी समाधान हो सके।बैठक को संबोधित करते हुए शिवानी रावत ने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का निरंतर प्रयास है कि विवादों का निस्तारण अदालतों की लंबी प्रक्रिया से हटकर आपसी सुलह, समझौता और मध्यस्थता के माध्यम से कराया जाए। इससे न केवल न्यायालयों पर बढ़ते बोझ में कमी आएगी, बल्कि आम नागरिकों को कम खर्च में, कम समय में और सम्मानजनक न्याय मिल सकेगा।बैठक का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि न्याय केवल फैसला नहीं, बल्कि पीड़ित को राहत और समाज को विश्वास देने का माध्यम बने और इसी भावना के साथ मध्यस्थता अभियान 2.0 को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।

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