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अमेठीः सार्वजनिक निधि के मिसमैनेजमेंट का जीवंत प्रमाण बना बारात भवन, उत्तरदायित्व पर उठे सवाल


अमेठी। जनपद के विकास खंड भेंटुआ की ग्राम सभा गैरिकपुर में सरकारी धन के नियोजन और अनुश्रक्षण में बरती गई घोर लापरवाही का एक गंभीर प्रकरण प्रकाश में आया है। पूर्वांचल विकास निधि जिलांश के अंतर्गत निर्मित बारात भवन, जो जन-उपयोग हेतु एक विधिक ट्रस्ट की भांति कार्य करना था, आज प्रशासनिक उदासीनता के कारण परित्यक्त घोषित  होने की स्थिति में पहुँच गया है। अभिलेखों के अनुसार, उक्त भवन का निर्माण 16 अगस्त 2010 को तत्कालीन विधायक रानी अमिता सिंह के कर-कमलों द्वारा संपन्न हुआ था। निर्माण कार्य की कार्यकारी संस्था ग्रामीण अभियंत्रण सेवा, सुलतानपुर थी। विडंबना यह है कि मात्र 15 वर्षों के अंतराल में ही यह संपदा जीर्ण शीर्ण अवस्था में पहुँच गई है। भवन के कपाट और खिड़कियाँ पूर्णतः नदारद हैं, जो संभावित रूप से सार्वजनिक संपत्ति की चोरी या असुरक्षा को इंगित करती हैं।वर्तमान में भवन का उपयोग मानवीय प्रयोजनों के स्थान पर आवारा पशुओं के अवैध आश्रय हेतु हो रहा है। दीवारों पर उग आए झाड़-झंखाड़ और उखड़ता प्लास्टर इस बात का विधिक प्रमाण है कि निर्माण के पश्चात इसकी वार्षिक रखरखाव नियमावली का पालन नहीं किया गया। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकोंकृजिनमें रघुराज तिवारी, कुलदीप तिवारी, राधेश्याम यादव, संदीप यादव, कुमार यादव, रवि सिंह, विक्की सिंह, विजय सिंह, पवन सिंह, महेश और राजेश यादव सम्मिलित हैंकृने इसे पब्लिक मनी लोक धन का आपराधिक अपव्यय करार दिया है। ग्रामीणों का तर्क है कि इस भवन के अनुपयोगी होने से निर्धन परिवारों को निजी मैरिज हॉल हेतु भारी शुल्क व्यय करना पड़ रहा है, जो उनके आर्थिक हितों का हनन है। वर्तमान प्रधान प्रतिनिधि जगन्नाथ तिवारी ने वस्तुस्थिति को स्वीकार करते हुए अपने पक्ष में कहा कि यद्यपि यह निर्माण उनके कार्यकाल की परिधि से बाहर का है, किंतु जनभावनाओं और लोकहित को देखते हुए वे इसके पुनर्द्धार हेतु प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस डेड एसेट को पुनः एक्टिव एसेट में परिवर्तित करने हेतु त्वरित कार्यवाही की जाएगी।

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