पीलीभीत। जनपद की राजनीति इन दिनों असामान्य रूप से गर्म है। पूर्व राज्यमंत्री हेमराज वर्मा के भाजपा से दूरी बनाकर पुनः समाजवादी पार्टी में शामिल होने की चर्चाओं ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। लखनऊ में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से उनकी मुलाकात की तस्वीर सामने आने के बाद अटकलों को नया आधार मिल गया है।बताया जा रहा है कि यह मुलाकात लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में हुई, जहां करीब एक घंटे तक संगठनात्मक स्थिति, जिले की राजनीतिक परिस्थितियों और आगामी चुनावी रणनीति पर चर्चा हुई। हालांकि दोनों दलों की ओर से आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिना ठोस कारण ऐसी मुलाकातें कम ही होती हैं। यही वजह है कि इसे संभावित “घर वापसी” की प्रस्तावना के रूप में देखा जा रहा है।
हेमराज वर्मा सपा शासनकाल में राज्यमंत्री रह चुके हैं और जिले में खासा जनाधार रखते हैं। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। सूत्रों के अनुसार भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें अपेक्षित संगठनात्मक जिम्मेदारी या प्रभावशाली भूमिका नहीं मिलीकृऐसी चर्चा लंबे समय से चल रही थी।राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि पार्टी की निर्णय प्रक्रिया में सीमित भागीदारी और स्थानीय स्तर पर घटती सक्रियता ने उन्हें असहज किया। कई मौकों पर वे सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए नजर आए, जिससे अटकलों को बल मिलता रहा।
सियासी गलियारों में चर्चा यह भी है कि यदि हेमराज वर्मा औपचारिक रूप से सपा में वापसी करते हैं, तो वे आगामी विधानसभा चुनाव में पीलीभीत सदर सीट से अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं। संगठनात्मक नेटवर्क और पिछड़े वर्ग में प्रभाव को देखते हुए यह मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय भी हो सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्मा की वापसी से सपा को न केवल एक अनुभवी चेहरा मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार भी होगा। वहीं भाजपा के लिए यह कदम रणनीतिक चुनौती बन सकता है, खासकर तब जब जिले में सामाजिक समीकरणों का संतुलन बेहद संवेदनशील माना जाता है।
सपा और भाजपाकृदोनों दलों के स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच इस मुलाकात को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। जहां सपा खेमे में उत्साह का माहौल बताया जा रहा है, वहीं भाजपा में इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ी तो आने वाले दिनों में लखनऊ या पीलीभीत में औपचारिक सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम आयोजित किया जा सकता है। ऐसे में जिले की राजनीति में नए गठजोड़ और समीकरण देखने को मिल सकते हैं।
फिलहाल स्थिति पूरी तरह अटकलों पर आधारित है, लेकिन इतना तय है कि लखनऊ की एक मुलाकात ने पीलीभीत की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि हेमराज वर्मा कब और किस मंच से अपने अगले राजनीतिक कदम की घोषणा करते हैं।
