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पीलीभीतः भारत अमेरिका अंतरिम ट्रेड समझौते के विरोध में पूरनपुर तहसील घिरी! भाकियू (चढ़ूनी) के बैनर तले सैकड़ों किसानों का प्रदर्शन


पीलीभीत। भारत और अमेरिका के बीच घोषित अंतरिम ट्रेड समझौते के विरोध में शुक्रवार को पूरनपुर तहसील परिसर आंदोलन का केंद्र बन गया। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के आह्वान पर सैकड़ों किसान दोपहर करीब 12 बजे तहसील पहुंचे और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। किसानों का आरोप है कि प्रस्तावित फ्री ट्रेड व्यवस्था से भारतीय कृषि, स्थानीय मंडियों और छोटे व्यापारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

प्रदर्शन की पूर्व सूचना के चलते प्रशासन पहले से अलर्ट रहा। पूरनपुर कोतवाली के साथ सेहरामऊ, माधोटांडा और घुंघचिहाई थानों की पुलिस फोर्स तैनात की गई। सिरसा चैराहा, मंडी समिति गेट और तहसील परिसर को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया। उपजिलाधिकारी अजीत प्रताप सिंह और पुलिस क्षेत्राधिकारी प्रतीक दहिया पूरे समय मौके पर मौजूद रहे और हालात पर नजर बनाए रखी।

तहसील परिसर में किसान नेताओं और प्रशासन के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  के पुतला दहन को लेकर तीखी बहस हुई। प्रशासन ने शांति व्यवस्था और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया। इस पर किसान नेताओं ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश बताते हुए विरोध जताया।

अनुमति न मिलने पर प्रदर्शनकारी पैदल मार्च करते हुए सिरसा चैराहे की ओर बढ़े, जहां पहले से पुतले रखे गए थे। चैराहे पर पुलिस और किसानों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। इस दौरान पुतलों के कपड़े फट गए और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। गुस्साए किसानों ने बचे हुए अवशेषों में आग लगा दी। एहतियातन पहले से तैनात फायर ब्रिगेड की टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया, जिससे कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।

किसान नेताओं का कहना है कि प्रस्तावित डील के तहत अमेरिकी कृषि उत्पादों पर टैरिफ में कमी या समाप्ति से सस्ते आयात बढ़ सकते हैं। इससे देश के किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा और स्थानीय मंडियां कमजोर पड़ेंगी। उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी देने, किसानों की कर्जमाफी, डीजल-बिजली पर राहत और कृषि लागत कम करने जैसी मांगें दोहराईं।संगठन के पदाधिकारियोंकृभूपेंद्र सिंह, गुरविंदर सिंह, गुरजिंदर सिंह, मनदीप सिंह, गुरप्रीत सिंह, जगविंदर सिंह, अमरीक सिंह सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल पूरनपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि देशव्यापी विरोध का हिस्सा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसानों की आशंकाओं पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

हालांकि प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी और हल्की धक्का-मुक्की हुई, लेकिन प्रशासनिक सतर्कता के चलते स्थिति नियंत्रण में रही। अतिरिक्त पुलिस बल की मौजूदगी और अधिकारियों के सतत पर्यवेक्षण के कारण कोई गंभीर अप्रिय घटना नहीं घटी। देर शाम तक प्रदर्शन शांतिपूर्वक समाप्त हो गया और किसान अपने-अपने गांवों को लौट गए।

पूरनपुर तहसील में हुआ यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों को लेकर किसानों के बीच गहरी आशंकाएं बनी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक बहस का प्रमुख विषय बन सकता है।

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