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मुसाफिरखाना: अंधेरे में बच्चों का भविष्य, पढ़ाई पर संकट


मुसाफिरखाना/अमेठी। शासन द्वारा कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को एक किलोमीटर की परिधि में स्थित स्कूलों में समायोजित करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं, लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। “स्कूल चले हम” योजना को ही अधिकारी पलीता लगाते नजर आ रहे हैं और मासूम बच्चों का भविष्य अंधेरे में जाता दिख रहा है। मामला विकासखंड क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय पूरे शिवदयाल, ग्राम दादरा का है, जिसे प्राथमिक विद्यालय पूरे पहलवान में समायोजित कर दिया गया है। ग्रामीणों और अभिभावकों का आरोप है कि पूरे शिवदयाल से पूरे पहलवान विद्यालय की दूरी करीब 2 किलोमीटर से अधिक है, जबकि कागजों में इसे 800 मीटर दर्शाया गया है। अभिभावक बसीर उल निशा और हिना बानो ने बताया कि छोटे-छोटे बच्चे इतनी लंबी दूरी तय कर स्कूल कैसे जाएंगे। दूरी अधिक होने के कारण बच्चों ने स्कूल जाना ही बंद कर दिया है। बच्चों खुशनूर बानो, फिजा, मोहम्मद इकबाल, दौलत अली और रहमान अली ने भी बताया कि स्कूल दूर होने के कारण वे पढ़ाई के लिए नहीं जा पा रहे हैं। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि दादरा संदीप सिंह उर्फ सोनू ने बताया कि इस संबंध में उच्च अधिकारियों को लिखित प्रार्थना पत्र दिया गया है। उनका आरोप है कि विद्यालय के प्रधानाचार्य अनिरुद्ध द्वारा गलत रिपोर्ट लगाकर अधिकारियों को गुमराह किया जा रहा है और वास्तविक दूरी को कम दर्शाया गया है। उन्होंने तत्काल पूरे शिवदयाल प्राथमिक विद्यालय को पुनः संचालित किए जाने की मांग की है। वहीं खंड शिक्षा अधिकारी सतीश सिंह का कहना है कि दूरी विद्यालय से नहीं बल्कि मजरे से नापी गई है और बच्चों का नामांकन कर दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि पूरे शिवदयाल में 30 से कम छात्र संख्या है। अब सवाल यह उठता है कि क्या कागजी आंकड़ों के सहारे बच्चों के भविष्य से समझौता किया जाएगा, या फिर जमीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए शासन के आदेशों का सही अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा? ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर विद्यालय पुनः चालू करने की मांग की है।

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