बिहारीगढ़। शेरपुर खाना जादपुर। गांव की तंग गलियों से दिन का उजाला हो या रात का अंधेरा अवैध खनन से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली गुजर रही हैं और जिम्मेदार महकमे खामोश नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उत्तराखंड से बिना वैध रॉयल्टी और टीपी (ट्रांजिट पास) के खनन सामग्री लाई जा रही है और गांव के रास्तों का इस्तेमाल “सेफ रूट” की तरह किया जा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक 2दृ4 कथित खनन माफिया बोलेरो और काली बिना नंबर प्लेट की क्रेटा जैसी गाड़ियों में गांव पहुंचते हैं। इनके संरक्षण में ट्रैक्टर-ट्रॉली को जबरन गलियों से निकलवाया जाता है। विरोध करने पर ग्रामीणों को धमकाने और दबाव बनाने के आरोप भी लगे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि उत्तराखंड में जगह-जगह टीपी चेकपोस्ट और नाके होने के बावजूद ये वाहन आखिर कैसे निकल रहे हैं? क्या चेकिंग व्यवस्था सिर्फ कागजों में चल रही है? ग्रामीणों का कहना है कि कई बार सूचना देने के बावजूद पुलिस की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे लापरवाही या मिलीभगत की आशंका गहराती जा रही है।
लगातार भारी वाहनों की आवाजाही से गांव की सड़कों पर गहरे गड्ढे हो चुके हैं। बरसात में हालात और बिगड़ जाते हैं, जिससे हादसों का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन और पुलिस की निष्क्रियता के कारण अवैध खनन करने वालों के हौसले बुलंद हैं। गांववासियों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है कि बिना रॉयल्टी और टीपी के चल रहे वाहनों को तुरंत सीज किया जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो और क्षतिग्रस्त सड़कों की जल्द मरम्मत कराई जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे धरना-प्रदर्शन और आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन कब जागता है या फिर अवैध खनन का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।
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