चांदा/सुल्तानपुर। विकासखंड प्रतापपुर कमैंचा क्षेत्र के ग्राम सिंहौली में शुक्रवार को आयोजित जन चैपाल ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बन गई। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चैपाल का आयोजन पंचायत भवन में होना था, लेकिन इसे जूनियर हाई स्कूल परिसर में आयोजित किया गया, जिससे ग्रामीणों के मन में कई सवाल खड़े हो गए।कार्यक्रम की अध्यक्षता एडीओ पंचायत दीपक प्रजापति ने की। पंचायत सचिव बृजेश कुमार ने बताया कि चैपाल के दौरान ग्रामीणों की समस्याएं सुनी गईं, जिनमें परिवार रजिस्टर की नकल, शौचालय मरम्मत एवं विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से संबंधित शिकायतें प्रमुख रूप से सामने आईं। साथ ही ग्रामीणों को सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओंकृपेयजल, प्रधानमंत्री आवास, शौचालय एवं पेंशनकृकी जानकारी भी दी गई।हालांकि, चैपाल पंचायत सचिवालय में न होकर विद्यालय परिसर में आयोजित किए जाने को लेकर ग्रामीणों में असंतोष देखा गया। इस संबंध में जब अधिकारियों से जानकारी ली गई तो बताया गया कि पंचायत भवन में पेंटिंग का कार्य चल रहा है, जिसके चलते कार्यक्रम का स्थान परिवर्तित किया गया। लेकिन मौके पर न तो कोई श्रमिक दिखाई दिया और न ही रंगाई-पुताई से संबंधित कोई कार्य होता नजर आया, जिससे ग्रामीणों में संदेह की स्थिति उत्पन्न हो गई।ग्रामीणों का कहना है कि यदि पंचायत भवन में कार्य प्रगति पर था, तो वहां श्रमिकों अथवा निर्माण सामग्री की उपस्थिति अवश्य दिखनी चाहिए थी। ऐसे में पारदर्शिता को लेकर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। शासन की मंशा के अनुरूप शुक्रवार जन चैपाल में विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित कर लोगों की समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण किया जाना चाहिए, किंतु जमीनी स्तर पर ऐसा होता नजर नहीं आया। अधिकांश विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी चैपाल में अनुपस्थित रहे, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी देखी गई।मौके पर पंचायत सचिव बृजेश कुमार, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सौरभ मौर्य, विद्यालय प्रधानाध्यापक बृज कुमार भारती, सफाई कर्मचारी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
ग्रामीणों ने मांग की है कि जन चैपाल जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों को औपचारिकता तक सीमित न रखकर पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ आयोजित किया जाए, ताकि आमजन को योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके।
