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बीसलपुरः विकसित भारत की राह में भविष्यवादी बजटरू पूंजीगत व्यय बढ़ाकर रोजगार और सशक्तिकरण पर जोर


बीसलपुर। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट 53.47 लाख करोड़ रुपए के खर्च के साथ पेश किया, जिसे विशेषज्ञों ने “भविष्य का बजट” कहा है। बजट में वर्तमान की बजाय भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर योजना बनाई गई है। इसमें पूंजीगत व्यय को 10 प्रतिशत बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपए किया गया है, जिसका लक्ष्य रोजगार सृजन, आधारभूत संरचना का विकास और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण है।

रोजगार सृजन और पूंजीगत निवेश में वृद्धि बजट में परिवहन, पर्यटन और उच्च शिक्षा क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने के साथ-साथ नारी सशक्तिकरण और लघु-मध्यम उद्योगों को प्राथमिकता दी गई है। वित्त मंत्री ने लघु और मध्यम उद्योगों के लिए 10 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। सेमीकंडक्टर और ।प् आधारित अर्थव्यवस्था में निवेश की घोषणाएं विकसित भारत के दूरगामी लक्ष्यों को साधने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही हैं।हालांकि निजी क्षेत्र से लिए गए कर्ज शामिल होने से वित्तीय अनुशासन पर चिंता व्यक्त की जा सकती है। गत वर्ष के राजकोषीय घाटे में केवल 0.1 प्रतिशत कमी का लक्ष्य रखा गया था।

ग्रामीण विकास के लिए महात्मा गांधी ग्रामीण स्वराज्य योजना की शुरुआत की गई है। जैव-फार्मा उद्योग में बड़े निवेश, आयात घटाने और निर्यात बढ़ाने की योजना से रुपये की गिरती स्थिति में सुधार की उम्मीद है। इसके लिए नए केमिकल पार्क और मेगा टेक्सटाइल पार्क की स्थापना की सिफारिश की गई है।

सात नए रेल गलियारों का निर्माण, 20 नए जल मार्ग और चुने हुए क्षेत्रों में नए बसे संचालित करने की व्यवस्था से भारत की आंतरिक अर्थव्यवस्था और व्यावसायिक क्षेत्र में गति आएगी।महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा हेतु हॉस्टल की सुविधा, औद्योगिक गलियारों के पास पांच विश्व विश्वविद्यालय परिसर की स्थापना और तकनीकी संस्थानों के निर्माण की घोषणा सराहनीय है। बजट में उद्योग-शिक्षा लिंक और अनुसंधान को बढ़ावा देने की दिशा में कुछ पहल की गई हैं, लेकिन नवीन शोध संस्थानों की स्थापना की आवश्यकता अब भी बनी हुई है।कृषि क्षेत्र में बजट अपेक्षाओं के अनुरूप पूरी तरह संतोषजनक नहीं रहा। नए बीजों के लिए अनुसंधान, मंडियों का विस्तार और उर्वरकों की आपूर्ति पर बजट में विशेष घोषणाएं नहीं की गईं।इसके बावजूद कृषि उत्पाद विविधता, जैसे काजू और अखरोट को बढ़ावा देने, जलाशयों का निर्माण और पशुधन के लिए निजी क्षेत्र के साथ चिकित्सा पद्धति के विकास पर जोर दिया गया है।

चिकित्सा क्षेत्र में सस्ती दवाओं की उपलब्धता, वरिष्ठ नागरिकों के लिए डेढ़ लाख देखभालकर्ताओं की व्यवस्था और मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने की घोषणाएं सकारात्मक हैं। पहली बार पांच अखिल भारतीय आयुर्वेदिक संस्थानों की स्थापना और भारतीय जड़ी-बूटियों के उत्पादन को बढ़ावा देना विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।साथ ही, खगोल विज्ञान, हिमालयी राज्यों का विकास और सौर ऊर्जा संबंधित उपकरणों पर कर छूट की व्यवस्था भी उल्लेखनीय है।

कर नीति और राजस्व प्रत्यक्ष कर नीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, कर स्लैब पिछले वर्ष की तरह जारी रहेगा। आयकर रिटर्न नियमों का सरलीकरण और अघोषित संपत्ति से संबंधित प्रावधान राजस्व में वृद्धि में मदद करेंगे।वित्त मंत्री द्वारा पेश किया गया यह बजट वर्तमान की नहीं, बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं पर केंद्रित है। पूंजीगत व्यय में वृद्धि, रोजगार सृजन, महिलाओं और शिक्षा के लिए विशेष प्रावधान, कृषि एवं ग्रामीण विकास के लिए योजनाएं और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार इसे विकास प्रधान बजट बनाती हैं।

हालांकि, राजकोषीय घाटा, कमजोर रुपये और निजी क्षेत्र से लिए गए कर्ज जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। कुल मिलाकर यह बजट एक सामान्य वार्षिक वित्तीय विवरण से अधिक, दूरगामी परिणाम देने वाला बजट कहा जा सकता है।

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