आगरा । उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चैहान ने बताया कि “रु-ब-रु” एक अभिनव संवाद आधारित पहल है, जो पुलिस अधिकारियों और विद्यार्थियों के बीच सीधे संवाद के माध्यम से लैंगिक समानता, अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूकता बढ़ा रही है। यह कार्यक्रम पारंपरिक जागरूकता अभियानों से अलग हटकर आपसी विश्वास, संवाद और साझा जिम्मेदारी पर आधारित है, जिससे सामाजिक मुद्दों को व्यवहारिक जीवन से जोड़ा जा सके।
डॉ. चैहान ने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य लैंगिक रूढ़ियों को तोड़ना और विद्यार्थियों की दैनिक सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना है। कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारी छात्रों को यौन उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, साइबर अपराध, बाल संरक्षण कानूनों तथा विभिन्न सुरक्षा प्रावधानों की सरल जानकारी देते हैं। इससे छात्रों में बिना भय के शिकायत दर्ज कराने का आत्मविश्वास बढ़ता है और समय पर रिपोर्टिंग की आदत विकसित होती है।
उन्होंने जानकारी दी कि “रु-ब-रु” कार्यक्रम अब तक प्रदेश के विभिन्न स्कूलों और विश्वविद्यालयों में 30,000 से अधिक विद्यार्थियों तक पहुँच बना चुका है। इसकी प्रभावशीलता को देखते हुए कार्यक्रम का दायरा अभिभावकों, शिक्षकों, विद्यालय कर्मियों और बस चालकों तक भी बढ़ाया गया है, ताकि बच्चों के लिए एक सुरक्षित और संवेदनशील वातावरण तैयार किया जा सके। इससे शैक्षणिक संस्थानों में लैंगिक सुरक्षा को संस्थागत स्वरूप मिल रहा है।
डॉ. बबीता सिंह चैहान ने बताया कि यूनिसेफ के सहयोग से इस पहल को तकनीकी मजबूती मिली है। बाल अधिकार, किशोर विकास और लैंगिक संवेदनशील संचार के क्षेत्र में यूनिसेफ की विशेषज्ञता के कारण कार्यक्रम की सामग्री को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। अब यह पहल केवल एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम न रहकर स्थायी व्यवहार परिवर्तन का मॉडल बनती जा रही है।
उन्होंने आगे कहा कि फीडबैक और जमीनी अनुभवों के आधार पर कार्यक्रम को लगातार बेहतर बनाया जा रहा है। इसमें व्यवहार विज्ञान, सॉफ्ट स्किल्स, केस स्टडी, रोल-प्ले और प्रेरक कहानियों को शामिल किया गया है। “अच्छा स्पर्श-बुरा स्पर्श”, मासिक धर्म स्वच्छता और किशोर स्वास्थ्य जैसे विषयों पर आयु के अनुरूप सत्र आयोजित किए जाते हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समान प्रभाव सुनिश्चित हो सके।
अध्यक्ष महोदया ने स्पष्ट किया कि “रु-ब-रु” पहल केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्थानों में आंतरिक शिकायत तंत्र को मजबूत करने और उत्पीड़न के प्रति शून्य-सहिष्णुता की संस्कृति विकसित करने पर भी बल देती है। सहानुभूति आधारित पुलिसिंग और भेदभाव विरोधी संवाद के माध्यम से यह कार्यक्रम पुलिस और नागरिकों के बीच विश्वास को मजबूत करने का कार्य कर रहा है।
