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लखनऊ: जिंदल स्टेनलेस और अमीदा क्लीनटेक ने ‘संजीवन’ पहल के तहत स्वच्छ वायु सुनिश्चित करने के लिए की साझेदारी


लखनऊ। भारत की अग्रणी स्टेनलेस स्टील निर्माता कंपनी जिंदल स्टेनलेस श्री काशी विश्वनाथ धाम (एसकेवीडी) रैम्प भवन में एक नई, स्वदेशी उन्नत ‘एयर प्यूरीफिकेशन’ प्रणाली स्थापित करने के लिए वित्तीय सहयोग कर रही है। इस परियोजना में ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट भी शामिल है। ‘संजीवन’ नामक यह पहल (जिसका अर्थ ‘जीवन को पुनर्स्थापित करना’ है) जिंदल स्टेनलेस की अब तक की सबसे बड़ी सीएसआर परियोजना है। इसे अमीदा क्लीनटेक प्राइवेट लिमिटेड (।डप्क्।) के सहयोग से कार्यान्वित किया जा रहा है, जिसके तहत अमीदा की नवीन परिवेशीय वायु शुद्धिकरण तकनीक को लागू किया जाएगा। यह पहल पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य शहर, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ एवं स्वस्थ हवा सुनिश्चित करना है। इस पहल को श्री काशी विश्वनाथ धाम प्राधिकरण से स्वीकृति प्राप्त हुई है। इस पहल के तहत मणिकर्णिका घाट पर दाह संस्कार स्थल के निकट स्थित एसकेवीडी परिसर के रैम्प भवन में विशिष्ट वायु शोधन प्रणाली स्थापित की जाएगी। इसका उद्देश्य मणिकर्णिका घाट पर जलती चिताओं से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकना है स अभ्युदय जिंदल, प्रबंध निदेशक, जिंदल स्टेनलेसय विश्व भूषण मिश्रा दृ पीसीएस, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यासय तथा सिद्धार्थ दीक्षित, प्रबंध निदेशक, अमीदा, श्री काशी विश्वनाथ धाम, वाराणसी, में वायु शुद्धिकरण इकाइयों की स्थापना हेतु एमओयू हस्ताक्षर समारोह के दौरानयह अपनी तरह की एक अनोखी और नई परियोजना है, जिसमें अमीदा की अट्रेक्ट-कैप्चर-एलिमिनेट (एसीई़) तकनीक का उपयोग है। इस तकनीक को नीति आयोग सहित प्रमुख सरकारी संस्थाओं द्वारा परीक्षण, सत्यापन और अनुमोदन प्राप्त है। यह प्रणाली हवा में मौजूद विभिन्न प्रदूषकों को आकर्षित कर, पकड़कर और समाप्त करने (एसीई दृ अट्रेक्ट-कैप्चर-एलिमिनेट) के सिद्धांत पर काम करती है, जो न केवल नैनो ब्लैक कार्बन, पोलेन और जैविक कणों समेत विभिन्न आकार के कणों (100 नैनोमीटर से 50 माइक्रॉन तक) को प्रभावी रूप से पकड़कर नष्ट कर देती है, बल्कि वाहनों से निकलने वाली जहरीली गैसों, जैसे सल्फर ऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड, के साथ-साथ वायरस और बैक्टीरिया जैसे सूक्ष्मजीवों को भी निष्क्रिय करती है, जिससे वातावरण अधिक स्वच्छ और स्वस्थ बनता है। इस परियोजना में स्टेनलेस स्टील की 58 वायु शुद्धिकरण इकाइयाँ शामिल हैं, जिनसे प्रति घंटे 3,00,000 घन मीटर से अधिक वायु शुद्धिकरण क्षमता हासिल की जाएगी।

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