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शाहिद कपूर ने हीरो बनने के लिए किया काफी स्ट्रगल! आम परिवार का लड़का आज बॉलीवुड पर कर रहा राज


शाहिद कपूर ने अपने दो दशक से ज्यादा के करियर में कमर्शियल ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं. उनकी हैदर, कबीर सिंह और उड़ता पंजाब जैसी फिल्मों में उनकी परफॉर्मेंस की क्रिटिक्स ने भी खूब तारीफ की है. इसी के साथ शाहिद कपूर ने खुद को हिंदी सिनेमा के एक सच्चे पावरहाउस के तौर पर इंडस्ट्री में मज़बूती से एस्टैब्लिश कर लिया है. कभी वे हिंदी सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में बैकग्राउंड डांसर थे लेकिन आज अपनी मेहनत के दम पर वे इंडस्ट्री के सबसे भरोसेमंद और वर्सेटाइल स्टार्स में से एक बन चुके हैं, इतने सालों में, उन्होंने अपनी मैग्नेटिक स्क्रीन प्रेजेंस, ध्यान से चुने गए रोल्स और ज़बरदस्त डांस मूव्स से लाखों दिलों पर कब्ज़ा किया है.हालांकि उनका ये सफर आसान नहीं रहा.

शाहिद कपूर का जन्म 25 फरवरी, 1981 को नई दिल्ली में हुआ था. उनके पिता पंकज कपूर हिंदी सिनेमा और थिएटर का जाना-माना नाम हैं, जबकि उनकी मां नीलिमा अज़ीम एक सेंसिटिव एक्ट्रेस और ट्रेंड डांसर रही हैं, लेकिन शाहिद का बचपन किसी फिल्मी कहानी जितना आसान नहीं था. जब वह सिर्फ तीन साल के थे, तो उनके माता-पिता का तलाक हो गया था. इससे उनकी ज़िंदगी शुरू में ही सीरियस हो गई. शाहिद अपनी मां के साथ किराए के घर में रहने लगे. कम रिसोर्स, इमोशनल अकेलापन और अनस्टेबल माहौल ने शाहिद को समय से पहले मैच्योर कर दिया था. बाद में नीलिमा अज़ीम ने एक्टर राजेश खट्टर से शादी कर ली, लेकिन शाहिद का बचपन ज़्यादातर स्ट्रगल में बीता.

शाहिद कपूर ने अपनी शुरुआती स्कूलिंग राजहंस विद्यालय, मुंबई से की. इसके बाद उन्होंने मीठीबाई कॉलेज, मुंबई में एडमिशन लिया. हालांकि, पढ़ाई के साथ-साथ उनका मन हमेशा स्टेज और कैमरे की तरफ खिंचता रहा. एक्टिंग और डांस उनके लिए सिर्फ़ शौक नहीं थे, बल्कि खुद को एक्सप्रेस करने का एक ज़रिया बन गए थे. इस दौरान उन्होंने देश के मशहूर कोरियोग्राफर श्यामक डावर के डांस इंस्टीट्यूट से प्रोफेशनल डांस ट्रेनिंग ली. यह फैसला बाद में उनके लिए लाइफ़-चेंजिंग साबित हुआ.

शाहिद फिल्म 'दिल तो पागल है' और 'ताल' में बैकग्राउंड डांसर थे. बैकग्राउंड डांसर के तौर पर काम करते हुए, वह ऐड फिल्मों और म्यूजिक वीडियो में दिखे, लेकिन उन्हें मिलने वाली फीस बहुत कम थी. उन पैसों से घर का खर्च चलाना और ऑडिशन के लिए मुंबई में रहना सबसे बड़ी चुनौती थी. जब शाहिद ऑडिशन के दौर से गुजर रहे थे, तो वह ब्रांडेड या अच्छे कपड़े नहीं खरीद पाते थे. कई बार, वह ऑडिशन के लिए दोस्तों से कपड़े उधार लेते थे, कुछ ऑडिशन में, उन्हें सिर्फ इसलिए रिजेक्ट कर दिया गया क्योंकि उनका लुक हीरो जैसा नहीं लग रहा था. कई बार शाहिद को ऑडिशन के लिए प्रोडक्शन ऑफिस के बाहर घंटों इंतजार करना पड़ता था. कई बार तो उन्हें अंदर भी नहीं बुलाया जाता था, वह कहते हैं कि कई बार, पूरे दिन घूमने के बाद भी, उन्हें एक भी ऑडिशन नहीं मिल पाता था.

लोगों को लगता है कि स्टार किड होने की वजह से शाहिद के लिए सब कुछ आसान हो गया, लेकिन असलियत इसके बिल्कुल उलट थी. शाहिद ने कभी अपने पिता पंकज कपूर से सपोर्ट नहीं लिया. उन्हें इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनानी थी, इसलिए उन्होंने जान-बूझकर अलग रास्ता चुना जब शाहिद ने एक्टिंग के लिए कोशिश करना शुरू किया, तो लगातार रिजेक्शन मिलने की वजह से उनका कॉन्फिडेंस कई बार डगमगाया भी था. एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें लगा कि शायद वे फिल्मों के लिए नहीं बने हैं, लेकिन डांस और एक्टिंग के उनके पैशन ने उन्हें रुकने नहीं दिया. इसके बाद उन्होंने कई म्यूजिक वीडियो भी किए और अब धीरे-धीरे उन्हें पहचान मिलने लगी थी

कई सालों के स्ट्रगल के बाद जब उन्हें 'इश्क विश्क' मिला, तो यह रोल भी आसानी से नहीं मिला. लंबे ऑडिशन प्रोसेस, लुक टेस्ट और स्क्रीन टेस्ट के बाद उन्हें यह फिल्म मिली, जिसने उनकी ज़िंदगी पूरी तरह बदल दी. इस फिल्म को रमेश तौरानी ने प्रोड्यूस किया था और यह शाहिद के लिए एक ड्रीम लॉन्च साबित हुई थी.

इश्क विश्क' की सफलता के बाद उम्मीद थी कि शाहिद स्टार बन जाएंगे, लेकिन फिल्म के बाद उनकी 'फिदा', 'दिल मांगे मोर', 'दीवाने हुए पागल', 'वाह! लाइफ हो तो ऐसी!', 'शिखर' और '36 चाइना टाउन' जैसी लगातार 6 फिल्में फ्लॉप हो गईं. फिर लोग उन्हें 'वन-फिल्म वंडर' मानने लगे थे. इस टैग ने शाहिद का कॉन्फिडेंस बुरी तरह तोड़ दिया. उन्होंने एक्टिंग छोड़ने का मन बना लिया था.

2006 में सूरज बड़जात्या ने शाहिद कपूर को 'विवाह' के लिए कास्ट किया। यह फैसला खुद शाहिद के लिए भी हैरान करने वाला था, क्योंकि तब तक उनका करियर लगभग डूब चुका था. 'विवाह' में प्रेम का किरदार शाहिद कपूर के लिए लाइफलाइन साबित हुआ..सिंपल किरदार, फैमिली वाली फिल्म और दमदार कहानी ने दर्शकों से सीधा कनेक्शन बनाया और ये हिट साबित हुई. इसके बाद 'जब वी मेट' जैसी फिल्मों ने उन्हें स्टारडम की नई ऊंचाइयां दीं.

'विवाह' और 'जब वी मेट' के बाद, शाहिद ने अपनी सेफ इमेज से बाहर निकलकर रिस्क लेना शुरू कर दिया. उन्होंने 'कमीने' में एक डार्क और रफ किरदार निभाकर क्रिटिक्स को हैरान कर दिया. 'हैदर' में उनकी ज़बरदस्त परफॉर्मेंस उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जाती है, और इसके लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड भी मिला. 'उड़ता पंजाब', 'पद्मावत' और 'कबीर सिंह' जैसी फिल्मों ने साबित कर दिया कि शाहिद किसी भी तरह के रोल में खुद को ढाल सकते हैं. अब शाहिद कपूर फिल्म 'ओ रोमियो' में से धमाल मचा रहे हैं.

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