संग्रामपुर: किसान पुत्र ने भेद दिया सफलता का चक्रव्यूह! यूजीसी नेट-जेआरएफ परीक्षा में 55वीं रैंक किया प्राप्त
February 08, 2026
संग्रामपुर/अमेठी। कहा जाता है कि प्रतिभा किसी परिचय की मोहताज नहीं होती और न ही सफलता के मार्ग में आर्थिक विषमताएं कभी बाधा बन सकती हैं। इस उक्ति को चरितार्थ कर दिखाया है अमेठी जनपद के भेटुआ विकास खंड अंतर्गत मकूनपुर ग्राम के वीरेंद्र पाल ने। वीरेंद्र ने शिक्षा जगत की प्रतिष्ठित यूजीसी नेट-जेआरएफ परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 55वीं रैंक प्राप्त कर न केवल अपने जनपद का गौरव बढ़ाया है, बल्कि ग्रामीण परिवेश के उन तमाम युवाओं के लिए एक मिसाल पेश की है जो संसाधनों की कमी को अपनी नियति मान लेते हैं। एक साधारण किसान परिवार में जन्मे वीरेंद्र की यह यात्रा अत्यंत प्रेरणादायी है। उनके पिता बाबूलाल पाल कृषि कार्य से परिवार का भरण-पोषण करते हैं, वहीं माता उर्मिला पाल एक कुशल गृहिणी हैं। वीरेंद्र की सफलता इसलिए भी विशेष है क्योंकि उनकी शैक्षणिक नींव गांव के ही प्राथमिक विद्यालय सुलतानपुर में रखी गई थी। सीमित संसाधनों के बावजूद, निरंतरता और उच्च शैक्षणिक दृष्टिकोण के बल पर उन्होंने देश के प्रतिष्ठित काशी हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातक एवं परास्नातक की उपाधियां प्राप्त कीं। हालिया घोषित परिणामों में, वीरेंद्र ने परीक्षा में सम्मिलित कुल 36,700 अभ्यर्थियों की कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी मेधा का लोहा मनवाते हुए शीर्ष स्थान सुरक्षित किया। इस विशिष्ट सफलता के फलस्वरूप उन्हें जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) के लिए चयनित किया गया है। विधि सम्मत नियमों के अनुसार, अब उनके आगामी शोध (एचडी) का पूर्ण आर्थिक भार यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन वहन करेगा, जो उनके शैक्षणिक करियर के लिए एक महत्वपूर्ण आधार स्तंभ है। जैसे ही वीरेंद्र की इस स्वर्णिम सफलता की सूचना मकूनपुर पहुंची, संपूर्ण क्षेत्र में उत्सव का माहौल व्याप्त हो गया। राजेश सिंह ठेकेदार, बृजेश पाल, अरुण पाल और रमन पाल सहित समस्त ग्रामवासियों ने वीरेंद्र को इस उपलब्धि पर बधाई दी। ग्रामीणों का कहना है कि वीरेंद्र ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि संकल्प दृढ़ हो और परिश्रम की पराकाष्ठा की जाए, तो वैश्विक स्तर के लक्ष्यों को भी सुगमता से प्राप्त किया जा सकता है।
