पीलीभीत। ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक सशक्तता और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित तीन दिवसीय जनपद स्तरीय सरस मेले का शुभारंभ रविवार को गांधी स्टेडियम परिसर में बड़े उत्साह और गरिमामय वातावरण में हुआ। यह मेला 22 से 24 फरवरी तक चलेगा और इसमें जिले भर के स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। उद्घाटन समारोह में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, बैंकिंग संस्थानों के प्रतिनिधियों तथा मिशन से जुड़े अधिकारियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिससे आयोजन का महत्व और बढ़ गया।
मेले में कुल 51 स्वयं सहायता समूहों द्वारा 40 आकर्षक स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, हुनर और रचनात्मकता का उत्कृष्ट प्रदर्शन दिखाई दे रहा है। स्टॉलों पर पारंपरिक जरी-जरदोजी कारीगरी, जूट से बने उपयोगी उत्पाद, आकर्षक आर्टिफिशियल ज्वेलरी, सहारनपुर शैली की लकड़ी की नक्काशी, मिट्टी के कलात्मक बर्तन, प्राकृतिक शहद, घर में तैयार अचार, पौष्टिक मोरिंगा पाउडर और होली पर्व को ध्यान में रखते हुए तैयार हर्बल गुलाल जैसे उत्पाद प्रमुख आकर्षण बने हुए हैं।इन उत्पादों की खासियत यह है कि ये स्थानीय संसाधनों से निर्मित, पर्यावरण-अनुकूल तथा हस्तनिर्मित हैं, जिससे खरीदारों में इनके प्रति विशेष उत्साह देखा जा रहा है। कई स्टॉलों पर पारंपरिक ग्रामीण शिल्पकला और आधुनिक डिजाइन का सुंदर संगम भी देखने को मिला, जिसने आगंतुकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
मेले को मनोरंजनपूर्ण बनाने के लिए आयोजकों ने स्वादिष्ट फास्ट-फूड स्टॉल, बच्चों के लिए झूले, शूटिंग गेम तथा अन्य मनोरंजक गतिविधियों की व्यवस्था भी की है। इससे परिवार सहित आने वाले आगंतुकों के लिए यह मेला खरीदारी के साथ-साथ मनोरंजन का भी केंद्र बन गया है।कार्यक्रम के दौरान न्यायिक अधिकारियों ने भी मेले का भ्रमण कर स्टॉलों का निरीक्षण किया और विभिन्न उत्पादों की खरीदारी कर महिला समूहों का उत्साहवर्धन किया। अधिकारियों ने महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों की गुणवत्ता, प्रस्तुति और पैकेजिंग की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से ग्रामीण उद्यमिता को सीधा बाजार मिलता है और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा मिलती है।
आयोजकों के अनुसार सरस मेले का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों को विपणन मंच प्रदान करना, उनकी आय बढ़ाना तथा ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित करना है। इस तरह के आयोजन न केवल आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं, बल्कि ग्रामीण संस्कृति, परंपरा और स्थानीय शिल्प को भी पहचान दिलाते हैं।
मेले में उमड़ रही भीड़ और उत्पादों की अच्छी बिक्री से समूह की महिलाओं में विशेष उत्साह और आत्मविश्वास दिखाई दे रहा है। कई समूहों ने बताया कि उन्हें पहले इतनी बड़ी संख्या में ग्राहकों से सीधा संवाद करने का अवसर नहीं मिला था, जिससे अब वे अपने उत्पादों की मांग, गुणवत्ता सुधार और बाजार की जरूरतों को बेहतर ढंग से समझ पा रही हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे मेलों का नियमित आयोजन किया जाए तो ग्रामीण महिला उद्यमियों को स्थायी बाजार, बेहतर आय और सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त हो सकती है। सरस मेला इसी दिशा में एक सशक्त पहल साबित हो रहा है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण की मिसाल भी प्रस्तुत कर रहा है।
