लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जीएसटी कर चोरी के एक ऐसे संगठित सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है, जिसने फर्जी फर्मों का मकड़जाल बुनकर सरकार को पौने तीन करोड़ रुपये से अधिक का चूना लगाया है। साइबर सेल और इंटौजा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार हुए इस गिरोह के तार बेहद शातिर तरीके से जुड़े थे, जिसमें पूर्व कैशियर और शिक्षित युवकों ने मिलकर अपराध का ढांचा तैयार किया था। यह गिरोह गरीब और जरूरतमंद मजदूरों को महज 10-20 हजार रुपये का लालच देकर उनके आधार, पैन और बैंक दस्तावेज हासिल करता था और फिर उनके नाम पर कागजों में 15 से अधिक बोगस फर्में खड़ी कर देता था। बिना किसी वास्तविक व्यापार के, इन फर्जी फर्मों के जरिए करोड़ों की बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (प्ज्ब्) केवल 1 प्रतिशत कमीशन पर बेची जा रही थी। पुलिस ने इनके पास से 136 से अधिक फर्जी बिल, भारी संख्या में सिम कार्ड और डेबिट कार्ड बरामद किए हैं
गिरोह के काम करने का तरीका बेहद शातिर था आरोपी तबस्सुम और प्रशांत कानपुर के गरीब और जरूरतमंद लोगों को 10 से 20 हजार रुपये का लालच देकर उनके आधार, पैन, बैंक खाता और मोबाइल नंबर हासिल कर लेते थे। इन दस्तावेजों के आधार पर मास्टरमाइंड अम्मार अंसारी फर्जी किरायानामा तैयार कर स्वराज ट्रेडर्स जैसी 15 से अधिक बोगस फर्में जीएसटी पोर्टल पर रजिस्टर कराता था। ये फर्में हकीकत में अस्तित्व में नहीं थीं, लेकिन कागजों पर एल्युमिनियम, स्क्रैप और स्टील की बिक्री दिखाकर फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल जारी किए जाते थे। इसके बदले में गिरोह वास्तविक कंपनियों को 1ः कमीशन पर बोगस प्ज्ब् बेचता था।
अम्मार अंसारी मास्टरमाइंड यह फर्जी फर्मों का रजिस्ट्रेशन और प्ज्ब् जनरेट करने का मुख्य काम करता था। यह पहले भी सीतापुर से जेल जा चुका है कानपुर के विशाल मेगा मार्ट में 8 हजार की नौकरी करने वाला प्रशांत, लाखों के लालच में तबस्सुम के साथ लखनऊ आ गया। इसका काम फर्जी इनवॉइस जनरेट करना और प्ज्ब् बेचना था।
तबस्सुम उर्फ जान्हवी इसने अपने रिश्तेदार अम्मार और दोस्त प्रशांत के साथ मिलकर लोगों के दस्तावेज जुटाने का नेटवर्क फैलाया। दौलत राम कानपुर का एक मजदूर जिसने मात्र 20 हजार के लालच में अपने दस्तावेज गिरोह को दे दिए।
बरामदगी का जखीरा
पुलिस ने आरोपियों के पास से भारी मात्रा में डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य बरामद किए हैं
- 20 से अधिक डेबिट कार्ड
- 26 से ज्यादा सिम कार्ड और 11 मोबाइल फोन
- 136 फर्जी बिलध्इनवॉइस और 1 लैपटॉप
- कई कूटरचित किरायानामे और बैंक दस्तावेज।
डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने बताया इस मामले का खुलासा तब हुआ जब सहायक आयुक्त राज्य कर अभिमन्यु पाठक ने स्वराज ट्रेडर्स द्वारा 52 लाख रुपये की संदिग्ध कर चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई। जांच के दौरान पता चला कि ैै ळ।स्।ग्ल् और ैै प्छज्म्त्च्त्प्ैम्ै जैसी कंपनियों ने भी इस गिरोह के साथ मिलकर करीब 19 लाख रुपये की कर चोरी की है। पुलिस ने इन कंपनियों के मालिक सुमित सौरभ को भी गिरफ्तार किया है।
