पीड़ित परिवारों का आरोप है कि अब तक जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सोनभद्र। ओबरा थाना क्षेत्र के बिल्ली–मारकुंडी इलाके में 15 नवंबर को हुए दर्दनाक खनन हादसे के बाद एक बार फिर अवैध व बेलगाम खनन का मुद्दा गरमा गया है। हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिजनों के आंसू अभी सूखे भी नहीं थे कि सोमवार को समाजवादी पार्टी का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने न सिर्फ शोक संतप्त परिवारों से मुलाकात कर संवेदना जताई, बल्कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देश पर मृतक परिजनों को आर्थिक सहायता भी प्रदान की। सपा प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से प्रत्येक मृतक के परिजनों को एक-एक लाख रुपये की सहायता राशि का चेक सौंपा गया। चेक सौंपते समय नेताओं ने कहा कि यह सहायता राशि पीड़ित परिवारों के दु:ख को कम तो नहीं कर सकती, लेकिन पार्टी हर हाल में उनके साथ खड़ी है और न्याय की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ी जाएगी। प्रतिनिधिमंडल में चंदौली के सांसद वीरेंद्र सिंह, भदोही के विधायक जाहिद बेग, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व विधायक अविनाश कुशवाहा प्रमुख रूप से शामिल रहे। नेताओं ने बिल्ली–मारकुंडी पहुंचकर पीड़ित परिवारों से अलग-अलग मुलाकात की, उनके हालात जाने और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। इस दौरान परिवारजनों ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि किस तरह खनन क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर काम कराया जा रहा था और हादसे के बाद जिम्मेदार लोग मौके से गायब हो गए। सपा नेताओं ने कहा कि सोनभद्र का खनन क्षेत्र लंबे समय से अव्यवस्था, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का शिकार रहा है। आए दिन हो रहे हादसे इस बात का प्रमाण हैं कि मजदूरों की जान की कोई कीमत नहीं समझी जा रही। सांसद वीरेंद्र सिंह ने कहा कि बिल्ली–मारकुंडी सहित पूरे खनन बेल्ट में अवैध खनन और ओवरलोडिंग खुलेआम हो रही है, लेकिन संबंधित विभाग आंख मूंदे बैठे हैं। जब तक बड़े स्तर पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे हादसे रुकने वाले नहीं हैं। मजदूरों से असुरक्षित हालात में काम कराया जा रहा है। हादसे के बाद मुआवजे और जांच की बातें तो होती हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद सब कुछ ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। उन्होंने मांग की कि मृतक परिजनों को सरकारी स्तर पर पर्याप्त मुआवजा, एक सदस्य को रोजगार और पूरे मामले की न्यायिक जांच कराई जाए। समाजवादी पार्टी हमेशा शोषितों, वंचितों और मजदूरों की आवाज उठाती रही है। बिल्ली–मारकुंडी हादसा कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी इस क्षेत्र में कई बार हादसे हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि अगर दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो पार्टी बड़े आंदोलन से भी पीछे नहीं हटेगी। प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान स्थानीय ग्रामीणों और सपा कार्यकर्ताओं की भी भारी भीड़ जुटी रही। ग्रामीणों ने नेताओं के सामने खनन कंपनियों और ठेकेदारों की मनमानी का खुलकर दर्द बयां किया। ग्रामीणों का कहना था कि खनन क्षेत्र में न तो सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता है और न ही मजदूरों को किसी प्रकार की बीमा या सामाजिक सुरक्षा दी जाती है। हादसे के बाद मजदूर परिवार पूरी तरह बेसहारा हो जाते हैं। गौरतलब है कि 15 नवंबर को बिल्ली–मारकुंडी क्षेत्र में खनन के दौरान बड़ा हादसा हुआ था, जिसमें कई मजदूर दब गए थे। इस हादसे में कुछ मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि कई घायल हुए थे। हादसे के बाद प्रशासन की ओर से जांच के आदेश तो दिए गए, लेकिन पीड़ित परिवारों का आरोप है कि अब तक जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सपा प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से मांग की कि खनन क्षेत्र में तत्काल प्रभाव से सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए, अवैध खनन पर रोक लगे और मजदूरों की जान से खेलने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो। नेताओं ने यह भी कहा कि सोनभद्र जैसे पिछड़े जिले में खनन से अरबों की कमाई की जा रही है, लेकिन यहां के मजदूर आज भी बदहाली की जिंदगी जीने को मजबूर हैं।
प्रतिनिधिमंडल के जाने के बाद पीड़ित परिवारों ने उम्मीद जताई कि शायद अब उनकी आवाज ऊपर तक पहुंचेगी और उन्हें न्याय मिलेगा। वहीं, सपा नेताओं ने भरोसा दिलाया कि यह मामला यहीं खत्म नहीं होगा, बल्कि पार्टी लगातार इस पर नजर रखेगी और जरूरत पड़ी तो आंदोलन का रास्ता भी अपनाया जाएगा। खनन हादसे के बाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर कब तक सोनभद्र के मजदूर यूं ही अपनी जान गंवाते रहेंगे और कब प्रशासन व सरकार जिम्मेदारी तय करेगी।
